मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बादशाहपुर तहसील में हजारों संपत्ति लेन-देन के रिकॉर्ड में गड़बड़ियां सामने आई हैं। इनमें एक ही PAN नंबर का लगभग 25 हजार रजिस्ट्रियों में इस्तेमाल होने और करीब 55 हजार करोड़ रुपये के संपत्ति लेन-देन का मामला जांच के दायरे में बताया जा रहा है।
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि यदि एक ही संदिग्ध PAN नंबर हजारों रजिस्ट्रियों में दर्ज हुआ है, तो यह जानना जरूरी है कि संबंधित अधिकारियों और विभागीय तंत्र ने समय रहते इस पर ध्यान क्यों नहीं दिया। संपत्ति की रजिस्ट्री जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में खरीदार और विक्रेता की पहचान, दस्तावेजों का सत्यापन तथा वित्तीय लेन-देन का सही रिकॉर्ड रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। इतने बड़े पैमाने पर रिकॉर्ड में विसंगतियां सामने आना व्यवस्था की कार्यप्रणाली की गंभीर समीक्षा की मांग करता है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता अपनी मेहनत की कमाई से जमीन और मकान खरीदती है तथा रजिस्ट्री प्रक्रिया को कानूनी सुरक्षा का आधार मानती है। ऐसे में यदि रजिस्ट्रियों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की आशंका सामने आती है, तो सरकार और संबंधित विभागों को चुप्पी साधने के बजाय तथ्यों के साथ जनता के सामने जवाब देना चाहिए। इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही हुई है या जानबूझकर नियमों की अनदेखी की गई है, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
राव नरेंद्र सिंह ने मांग की कि बादशाहपुर तहसील में पिछले वर्षों के संपत्ति पंजीकरण रिकॉर्ड, PAN नंबरों के सत्यापन, आयकर विभाग को भेजी गई सूचनाओं और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की विस्तृत जांच की जाए। जांच में यह भी स्पष्ट किया जाए कि हजारों रजिस्ट्रियों में एक ही PAN नंबर कैसे दर्ज हुआ, संबंधित वित्तीय लेन-देन की जानकारी में विसंगतियां क्यों आईं और इस पूरी प्रक्रिया में जिम्मेदारी किस स्तर पर बनती है।
उन्होंने कहा कि लगभग 55 हजार करोड़ रुपये के संपत्ति लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड में सामने आई विसंगतियों को हल्के में नहीं लिया जा सकता। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले इसे साबित हो चुका घोटाला या कर चोरी करार देना उचित नहीं है, लेकिन इतने बड़े मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और हर सवाल का जवाब देना सरकार की जिम्मेदारी है।
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश की जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उसकी जमीन-जायदाद से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों की व्यवस्था कितनी सुरक्षित और पारदर्शी है। सरकार को इस मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कर सच्चाई सामने लानी चाहिए, ताकि जिम्मेदारी तय हो और भविष्य में ऐसी अनियमितताओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
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