एक वर्ष के भीतर 10 अंकों की कमी का लक्ष्य
न्यूज़म ब्यूरो
चंडीगढ़, 10 सितंबर। हरियाणा की स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने गुरुवार को राज्य में एनीमिया के बोझ को अगले एक साल के भीतर 10 अंक तक कम करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य की घोषणा की। यह कदम हरियाणा द्वारा ‘एनीमिया मुक्त भारत अभियान’ के तहत एक विस्तारित 7x7x7 ढांचे को लागू करने की तैयारियों के बीच उठाया गया है।
डॉ मिश्रा ने बताया कि यह 7×7×7 दृष्टिकोण एनीमिया से लड़ने की एक सरल रणनीति है, जो सात प्रमुख लक्षित समूहों पर ध्यान केंद्रित करती है। इसमें आयरन-फॉलिक एसिड सप्लीमेंटेशन, जांच और उपचार, पेट के कीड़े मारने की दवा (डिवर्मिंग) और पोषण संबंधी परामर्श जैसी सात प्रमुख पहलों का उपयोग किया जाता है। साथ ही, सात प्रणालियों को मजबूत किया जाता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि ये सेवाएं लोगों तक नियमित रूप से पहुँचती रहें।
इस गहन रणनीति के तहत छह महीने तक की उम्र के कम वजन वाले बच्चों को लाभार्थी ढांचे के दायरे में लाया जाएगा। इसके अलावा, स्थानीय रूप से उपलब्ध आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थों और विविध आहार को बढ़ावा दिया जाएगा, तथा डिजिटल निगरानी और केस ट्रैकिंग को मजबूत किया जाएगा। यह एनीमिया के खिलाफ तकनीक-संचालित और परिणाम-आधारित कार्रवाई की दिशा में एक बड़ा बदलाव है।
आज चंडीगढ़ में राज्य स्तरीय ‘एनीमिया मुक्त हरियाणा’ कार्यशाला को संबोधित करते हुए डॉ. मिश्रा ने बताया कि 17 सितंबर से 100 दिनों का एक सघन अभियान शुरू होगा। इसमें राज्य का ध्यान हर लाभार्थी तक पहुँचने, आपूर्ति श्रृंखला के अंतिम छोर को मजबूत करने और यह सुनिश्चित करने पर होगा कि चिन्हित किए गए एनीमिया के प्रत्येक मामले का न केवल परीक्षण और उपचार किया जाए, बल्कि वांछित परिणाम मिलने तक उसकी ट्रैकिंग भी की जाए।
हरियाणा ने कई लाभार्थी समूहों में एनीमिया के प्रसार में पहले ही उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की है। राज्य के ‘एनीमिया ट्रैकिंग वेब एप्लीकेशन’ के आंकड़ों से पता चलता है कि एनीमिया का कुल ट्रैक किया गया प्रसार 2022-23 के 59.3 प्रतिशत से घटकर जून 2026 में 47.7 प्रतिशत हो गया है, जो राज्य को अभियान के अगले और अधिक आक्रामक चरण के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है।
सबसे महत्वपूर्ण सुधार 6 से 59 महीने के बच्चों में दर्ज किया गया है, जहाँ एनीमिया का प्रसार 2022-23 में 57.7 प्रतिशत से घटकर जून 2026 में 34.1 प्रतिशत रह गया है—यह 23 प्रतिशत अंक से अधिक की गिरावट है।
5 से 9 वर्ष की आयु के बच्चों में यह दर 54.8 प्रतिशत से घटकर 45.4 प्रतिशत हो गई है। गर्भवती महिलाओं में एनीमिया का प्रसार 69.8 प्रतिशत से घटकर 53.3 प्रतिशत पर आ गया है, जबकि प्रजनन आयु वर्ग की महिलाओं में यह 70 प्रतिशत से घटकर 63.8 प्रतिशत हो गया है।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि इन सुधारों से यह स्पष्ट होता है कि हरियाणा के प्रयासों के परिणाम मिल रहे हैं, लेकिन उन्होंने इस बात पर बल दिया कि राज्य अब ढील नहीं दे सकता। उन्होंने कहा कि तकनीक हमारी सहायता के लिए मौजूद है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर बदलाव को परिवर्तनकारी बनाने के लिए हमारी दृढ़ इच्छाशक्ति की आवश्यकता है। उन्होंने जिलों से एक-दूसरे की उपलब्धियों से सीखने और सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने का आग्रह किया।
डॉ. मिश्रा ने बताया कि अगला चरण ‘T4’ दृष्टिकोण—टेस्ट (Test), ट्रीट (Treat), टॉक्स (Talk) और ट्रैक (Track)—द्वारा संचालित होगा। यह केवल पहचान और उपचार तक सीमित रहने के बजाय व्यक्तिगत केस प्रबंधन, निरंतर फॉलो-अप और मापने योग्य स्वास्थ्य परिणामों की दिशा में एक बड़ा बदलाव है।
एनीमिया को दूरगामी परिणामों वाली चुनौती बताते हुए उन्होंने कहा कि यह मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के साथ-साथ बच्चों के सीखने के परिणामों और उनके भविष्य की क्षमताओं को प्रभावित करता है। इसलिए, सामयिक प्रयासों के बजाय निरंतर संस्थागत तत्परता की आवश्यकता है।
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