चंडीगढ़ : हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने प्रदेश भर में अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं में पाई गई गंभीर कमियों का स्वतः संज्ञान लेते हुए “हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म” एवं “टर्न टेबल लैडर्स” जैसे अत्यावश्यक उपकरणों की खरीद में पिछले पाँच वर्षों से हो रही अक्षम्य देरी पर गहरी चिंता व्यक्त की है। आयोग ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि विशेषकर ऊँची इमारतों एवं घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में इस प्रकार की दीर्घकालीन निष्क्रियता आम नागरिकों के जीवन एवं सुरक्षा के लिए प्रत्यक्ष खतरा है।
सुओ मोटो केस संख्या 1000/3/2022 में पारित अपने आदेश में आयोग ने अवलोकन किया कि “हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म” एवं “टर्न टेबल लैडर्स” अग्नि सुरक्षा, आपातकालीन निकासी तथा बहु-मंजिला इमारतों एवं सार्वजनिक स्थलों में संरचनात्मक कार्यक्षमता सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण सुरक्षा एवं पहुँच संबंधी उपकरण हैं। ये उपकरण उस स्थिति में, जब आग, भूकंप या किसी संरचनात्मक आपदा के दौरान पारंपरिक सीढ़ियाँ अथवा लिफ्टें अनुपयोगी हो जाती हैं, तब स्वतंत्र एवं यांत्रिक रूप से सहायता प्राप्त सुरक्षित निकास का साधन उपलब्ध कराते हैं। इसके अतिरिक्त, ये अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं को बाहर से ही ऊपरी मंजिलों तक शीघ्र पहुँचने में सक्षम बनाते हैं।
साथ ही, ये प्रणालियाँ वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों तथा रोगियों के लिए सार्वभौमिक पहुँच सुनिश्चित करती हैं, जिससे निकासी के समय घबराहट, भीड़भाड़ एवं भगदड़ की संभावनाएँ कम होती हैं। लिफ्टों के विपरीत, हाइड्रोलिक प्रणालियाँ विद्युत आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में भी कार्य कर सकती हैं, जिससे संकट की घड़ी में विश्वसनीय वैकल्पिक ऊर्ध्वाधर पहुँच उपलब्ध होती है। इनकी अनुपस्थिति सार्वजनिक सुरक्षा एवं आपदा तैयारी को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है, जबकि इनका समावेशन आधुनिक भवन सुरक्षा मानकों एवं शहरी अवसंरचना मानदंडों के अनुपालन को सुनिश्चित करता है।
आयोग ने हरियाणा विकास एवं शहरी क्षेत्रों के विनियमन अधिनियम, 1975 के प्रावधानों का भी परीक्षण किया। उक्त अधिनियम किसी भी ऐसे भू-स्वामी को, जो अपनी भूमि को “कॉलोनी” में परिवर्तित करना चाहता है, लाइसेंस प्रदान करने से संबंधित है। अधिनियम, 1975 की धारा 3 विशेष रूप से लाइसेंस हेतु आवेदन से संबंधित है। धारा 2 की खंड (e) में “विकास कार्य” की परिभाषा दी गई है, जिसमें आंतरिक एवं बाह्य विकास कार्य सम्मिलित हैं। धारा 2 की खंड (g) में “बाह्य विकास कार्य” की परिभाषा स्पष्ट रूप से “अग्निशमन केंद्र” जैसे कार्यों को भी सम्मिलित करती है।
धारा 3 की उप-धारा (3) यह स्पष्ट रूप से उपबंधित करती है कि लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाला व्यक्ति, यदि धारा 2 की खंड (g) में परिभाषित “बाह्य विकास कार्य” सरकार या किसी अन्य स्थानीय प्राधिकरण द्वारा किए जाने हैं, तो विकास शुल्क का भुगतान करेगा। उल्लेखनीय है कि “बाह्य विकास कार्य” की परिभाषा में नियोजित एवं सुरक्षित शहरी विकास हेतु आवश्यक “किसी अन्य कार्य” को सम्मिलित करने वाला सक्षमकारी प्रावधान भी निहित है। इस परिप्रेक्ष्य में, “हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म” एवं “टर्न टेबल लैडर्स” को सम्मिलित करना, धारा 3 के अंतर्गत “अग्निशमन केंद्रों” को “बाह्य विकास कार्य” के रूप में शामिल किए जाने की विधायी मंशा के अनुरूप है, क्योंकि ये दोनों ही मानव जीवन की रक्षा के लिए आवश्यक
सुरक्षा उपाय हैं।
उपरोक्त के आलोक में, आयोग ने सिफारिश की है कि “हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म” एवं “टर्न टेबल लैडर्स” को औपचारिक रूप से अधिनियम, 1975 के अंतर्गत “बाह्य विकास कार्य” के रूप में मान्यता दी जाए। परिणामस्वरूप, अन्य “बाह्य विकास कार्यों” पर लागू भुगतान/अंशदान संबंधी प्रावधान इन उपकरणों पर भी लागू हों, जिससे इन्हें वित्तीय एवं नियामकीय मान्यता सुनिश्चित हो सके। ऐसा समावेशन न केवल अधिनियम, 1975 की व्यापक एवं सुरक्षित शहरी अवसंरचना उपलब्ध कराने की विधायी मंशा के अनुरूप होगा, बल्कि विशेषकर बहु-मंजिला इमारतों एवं सार्वजनिक संरचनाओं में सुरक्षा मानकों को भी सुदृढ़ करेगा।
अपने आदेश में आयोग ने हाल ही में हांगकांग में हुई एक बड़ी अग्नि त्रासदी का भी उल्लेख किया और चेतावनी दी कि यदि इस प्रकार की आपदाएँ विकसित देशों में भी घटित हो सकती हैं, तो आवश्यक अग्निशमन उपकरणों के अभाव में हमारे प्रदेश में जोखिम कहीं अधिक गंभीर हो जाता है। आयोग ने स्पष्ट किया कि सरकार को किसी विनाशकारी घटना की प्रतीक्षा किए बिना तत्काल एवं निर्णायक कार्रवाई करनी चाहिए।
आयोग ने सख्त शब्दों में दोहराया है कि हरियाणा सरकार को इस विषय को अत्यंत तात्कालिकता एवं गंभीरता से लेना होगा। किसी भी प्रकार की आगे की देरी जनता को अपूरणीय किंतु रोके जा सकने वाले नुकसान के जोखिम में डाल देगी। आयोग ने निर्देश दिया है कि खरीद प्रक्रिया को बिना किसी प्रक्रियात्मक विलंब के शीघ्र पूर्ण किया जाए तथा अगली सुनवाई तिथि से पूर्व एक स्पष्ट, समयबद्ध कार्ययोजना आयोग के समक्ष प्रस्तुत की
जाए।
इस संबंध में अनुपालन रिपोर्ट अतिरिक्त मुख्य सचिव, हरियाणा सरकार, नगर एवं ग्राम नियोजन तथा शहरी संपदा विभाग, चंडीगढ़; महानिदेशक, नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग, हरियाणा, चंडीगढ़ तथा महानिदेशक, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएँ, हरियाणा, पंचकूला से तलब की गई हैं। उपरोक्त अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे 10.02.2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस आयोग के समक्ष अपनी-अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें, ताकि प्रभावी एवं सार्थक संवाद सुनिश्चित किया जा सके।
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