छेड़छाड़ और असुरक्षा के डर से पढ़ाई न छोड़े बेटियां, प्रदेशव्यापी बस सेवा की मांग : दीपक धनखड़

 
600 बसों की घोषणा हुई, डेटा भी लिया गया, मुकदमे भी लग चुके, फिर क्यों नहीं चली बसें : दीपक धनखड़
 
सुरक्षित परिवहन ही बेटियों की शिक्षा की पहली शर्त है, शिक्षा मंत्री से मुलाकात में उठा बड़ा मुद्दा
 
हरियाणा की बेटियों की पढ़ाई का सवाल, एएसएपी छात्र संगठन ने सरकार से तत्काल निर्णय की मांग की
 
रोहतक, 26 दिसंबर : आज आम आदमी पार्टी के छात्र संगठन एसोसिएशन ऑफ स्टूडेंट्स फॉर अल्टरनेटिव पॉलिटिक्स (एएसएपी) हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष दीपक धनखड़ ने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक में हरियाणा सरकार के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा जी से मुलाकात कर प्रदेश भर की छात्राओं की सुरक्षा और शिक्षा से जुड़े एक अत्यंत गंभीर विषय को उनके समक्ष विस्तार से रखा। यह मुलाकात विशेष रूप से प्रदेश के हर गांव, कस्बे , शहर से हरियाणा के प्रत्येक कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों तक पढ़ने जाने वाली छात्राओं के लिए विशेष फ्री बस सेवा प्रारंभ करवाने की मांग को लेकर की गई। 
 

दीपक धनखड़ ने शिक्षा मंत्री को अवगत कराया कि यह मांग नई नहीं है, बल्कि पिछले कई वर्षों से लगातार शांतिपूर्ण ढंग से उठाई जाती रही है। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के कार्यकाल में भी इस विषय पर विरोध दर्ज करवाया गया था और शांतिपूर्ण तरीके से सरकार का ध्यान आकृष्ट किया गया था, लेकिन दुर्भाग्यवश उस दौरान इस आंदोलन के कारण उन पर दो मुकदमे भी दर्ज कर दिए गए। इसके बावजूद सरकार द्वारा कोई ठोस समाधान नहीं किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने लगभग तीन वर्ष पूर्व घोषणा की थी कि प्रदेश भर में लगभग 600 विशेष बसें गांवों से शिक्षण संस्थानों तक छात्राओं के लिए चलाई जाएंगी, और लगभग एक वर्ष पूर्व सभी शिक्षण संस्थानों से यह डेटा भी एकत्र किया गया था कि किस गांव से कितनी छात्राएं आती हैं, लेकिन आज तक उस पर कोई अमल नहीं हुआ।
 
छात्र नेता दीपक धनखड़ ने कहा कि वर्तमान परिस्थिति में छात्राओं को प्रतिदिन गंभीर असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है। अधिकतर छात्राएं शाम लगभग 5 बजे विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से घर के लिए निकलती हैं। सर्दियों में दिन छोटे होते हैं और जल्दी अंधेरा हो जाता है, जिससे रास्ते में छेड़छाड़, बदसलूकी और असुरक्षा की घटनाएं लगातार सामने आती रहती हैं। जिन छात्राओं के पास निजी साधन नहीं होते, या जिनके परिवार सुरक्षा के डर से उन्हें बाहर पढ़ने नहीं भेजते, वे मजबूरी में अपनी पढ़ाई छोड़ देती हैं। यह न केवल उनके व्यक्तिगत भविष्य के साथ अन्याय है बल्कि पूरे समाज और प्रदेश के विकास के लिए भी घातक है। यदि सुरक्षित परिवहन उपलब्ध कराया जाए तो हजारों बेटियां बिना भय के शिक्षा प्राप्त कर सकेंगी और कोई भी बेटी केवल परिवहन के अभाव में शिक्षा से वंचित नहीं होगी।
 

 
शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने पूरी बात बहुत ध्यान से सुनी और आश्वासन दिया कि यह सुझाव प्रदेश भर की छात्राओं के भविष्य और महिला सशक्तिकरण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि वे इस विषय को व्यक्तिगत रूप से प्राथमिकता के आधार पर लेंगे और शीघ्र ही इस पर काम शुरू करवाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगली बार जब वे विश्वविद्यालय आएंगे तो उनकी कोशिश रहेगी कि उससे पहले ही इस विषय पर ठोस निर्णय हो चुका हो और जब पुनः मुलाकात हो तो इस विषय पर सकारात्मक परिणाम साझा किए जा सकें। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश भर में रिक्त पड़े शिक्षकीय एवं गैर-शिक्षकीय पदों को भी शीघ्र भरने की आवश्यकता पर सहमति जताई और कहा कि इस दिशा में भी सरकार जल्द कदम उठाएगी।
इस अवसर पर दीपक धनखड़ ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि जिस संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ शिक्षा मंत्री ने इस विषय को सुना है, उसी प्रकार शीघ्र इस पर अमल भी किया जाएगा और प्रदेश की बेटियों को सुरक्षित शिक्षा का अधिकार वास्तव में प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि हमें पूर्ण विश्वास है कि शिक्षा मंत्री द्वारा दिया गया आश्वासन केवल शब्द नहीं रहेगा, बल्कि जल्द ही ज़मीनी हकीकत में बदलेगा और हमारी मांगें शीघ्र मान ली जाएंगी।
 

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