चंडीगढ़, 02 जनवरी 2026 : हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने जिला कैथल के गुहला–चीका क्षेत्र में संचालित राइस शेलरों/मिलों से उत्पन्न वायु एवं जल प्रदूषण के गंभीर मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि स्वच्छ पर्यावरण में जीवन का अधिकार नागरिकों का मौलिक मानव अधिकार है, जिससे किसी भी स्थिति में समझौता नहीं किया जा सकता।
आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा दोनों सदस्यों कुलदीप जैन और दीप भाटिया को मिलाकर बने पूर्ण आयोग के समक्ष शिकायत संख्या 384/9/2023 की सुनवाई के दौरान हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) कैथल क्षेत्र द्वारा प्रस्तुत स्थिति रिपोर्ट का गहन परीक्षण किया गया।रिपोर्ट से यह तथ्य सामने आया कि राधा कृष्ण राइस एवं जनरल मिल्स अथवा आर.के. राइस एवं जनरल मिल्स, पटियाला रोड, सादरहेड़ी, चीका, कैथल को खुले गड्ढे में घरेलू अपशिष्ट जल का निर्वहन करते हुए पाया गया, जिसके कारण इसे बंद करने की संस्तुति मुख्यालय, एचएसपीसीबी, पंचकुला को भेजी गई।
तथापि, अभिलेखों से यह स्पष्ट नहीं है कि उक्त संस्तुति पर कोई अंतिम निर्णय लिया गया है या नहीं। मात्र संस्तुति कर देना, बिना समयबद्ध प्रवर्तन
के, पर्यावरण संरक्षण एवं प्रभावित क्षेत्र के निवासियों के मानव अधिकारों की रक्षा हेतु बनाए गए वैधानिक तंत्र के उद्देश्य को विफल करता है। अतः जस्टिस ललित बत्रा की अध्यक्षता वाले पूर्ण आयोग ने अध्यक्ष, एचएसपीसीबी, पंचकुला को निर्देशित है कि वे उक्त इकाई के संबंध में बंद करने की संस्तुति पर विचार कर विधि अनुसार शीघ्र अंतिम निर्णय लें तथा यह सुनिश्चित करें कि अंतिम निर्णय तक उक्त इकाई कोई भी प्रदूषणकारी गतिविधि न करे।
हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने वायु प्रदूषण की निगरानी प्रणाली पर भी गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि नमूने उस समय लिए जाएँ जब इकाइयाँ संचालित ही न हों, तो वास्तविक प्रदूषण का आकलन संभव नहीं है। इसलिए, क्षेत्रीय अधिकारी, एचएसपीसीबी को निर्देश दिए गए हैं कि राइस शेलरों के वायु उत्सर्जन के नमूने अनिवार्य रूप से रात्रिकालीन समय में, जब इकाइयाँ पूर्ण रूप से संचालित हों, तभी लिए जाएँ। इसके लिए बिना पूर्व सूचना के रात्रि में आकस्मिक एवं यादृच्छिक निरीक्षण किए जाएँगे।
जस्टिस ललित बत्रा की अध्यक्षता वाले पूर्ण आयोग की प्रमुख सिफारिशें एवं निर्देश :
CPCB दिशा-निर्देशों को अपनाने की सिफारिश: आयोग ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के दिशा-निर्देशों का उल्लेख करते हुए सिफारिश की है कि राइस शेलर/मिलों के लिए निर्धारित साइटिंग मानदंड हरियाणा राज्य में अपनाए जाएँ। भविष्य में नई इकाइयों की स्थापना के समय आवासीय क्षेत्रों से न्यूनतम निर्धारित दूरी तथा क्षेत्र की पर्यावरणीय वहन क्षमता का कड़ाई से परीक्षण किया जाना आवश्यक
होगा।
ग्रीन बेल्ट/हरित पट्टी का विकास: पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से आयोग ने ग्रीन बेल्ट को अनिवार्य बताया है। इसके तहत 20 टन प्रति घंटा से अधिक क्षमता वाली मौजूदा राइस मिलों में तीन (3) मीटर चौड़ी हरित पट्टी विकसित की जाएगी। अन्य राइस शेलर/मिलों में सीमा-दीवार के साथ कम से कम दो कतारों में फैलावदार छत्र वाले वृक्ष लगाए जाएँगे।
नई इकाइयों के लिए अनिवार्य शर्त: नई राइस शेलर/मिल इकाइयों को संचालन की अनुमति (CTO) देने से पूर्व वृक्षारोपण एवं ग्रीन बेल्ट के विकास का प्रमाण प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
अध्यक्ष, एचएसपीसीबी, पंचकुला तथा क्षेत्रीय अधिकारी, एचएसपीसीबी, कैथल क्षेत्र, अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पूर्व अपनी-अपनी की गई कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। निरीक्षण के समय ग्राम खुशहाल माजरा के केवल दो व्यक्तियों को ही सम्मिलित किया जाएगा।
आयोग के असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा ने बताया कि हरियाणा मानव अधिकार आयोग के आदेश से स्पष्ट है कि इस शिकायत में उठाए गए मुद्दे केवल गुहला-चीका क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि राज्य के अन्य क्षेत्रों में भी समान समस्याएँ हो सकती हैं। अतः हरियाणा राज्य के सभी क्षेत्रीय अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्राधिकार में आने वाले राइस शेलर/मिलों का आकस्मिक निरीक्षण करने के निर्देश दिए जाते हैं। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी इकाइयों में वायु एवं जल प्रदूषण नियंत्रण उपकरण, जैसे साइक्लोन/मल्टी-साइक्लोन, कवर शेड, स्क्रबर आदि पूर्णतः स्थापित, कार्यशील एवं निरंतर संचालित हों। राज्य के सभी क्षेत्रीय अधिकारियों को निर्देशित किया जाता है कि वे अपनी विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट अगली सुनवाई की तिथि 19.03.2026 से कम से कम एक सप्ताह पूर्व आयोग के समक्ष प्रस्तुत करें।
पढ़ने के लिए धन्यवाद
आपका समय और भरोसा हमारे लिए बहुत मायने रखता है। अगर यह खबर आपके लिए उपयोगी रही, तो हमसे जुड़े रहें — हर ज़रूरी खबर के लिए Newsam को फ़ॉलो करें।