एमडीयू के स्वर्ण जयंती एवं एलुमनाई अभिनंदन समारोह में देश के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत का सम्मान, मूल्यों आधारित शिक्षा पर दिया जोर

कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने नवाचार, शोध और समावेशी शिक्षा को बताया विश्वविद्यालय की प्राथमिकता, विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले पूर्व छात्र सम्मानित

न्यूज़म ब्यूरो

चंडीगढ़, 14 फरवरी : जीवन में सफलता के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारण, कड़ी मेहनत, अनुशासन और लक्ष्य प्राप्ति की दृढ़ इच्छाशक्ति आवश्यक है। इस मार्ग पर सत्यनिष्ठा, मूल्य और नैतिकता के साथ-साथ समाज एवं राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

यह प्रेरक विचार भारत के मुख्य न्यायाधीश एवं महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक के विधि विभाग के पूर्व छात्र न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने विश्वविद्यालय के स्वर्ण जयंती एवं एलुमनाई अभिनंदन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए। 

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न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने अपने मातृ संस्थान में बिताए गए दिनों को स्मरण करते हुए कहा कि एमडीयू परिसर में उन्हें कभी उनकी ग्रामीण पृष्ठभूमि के कारण भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा। विश्वविद्यालय ने समावेशी वातावरण प्रदान किया, जहाँ केवल प्रतिभा, परिश्रम और बौद्धिक क्षमता को महत्व दिया गया। उन्होंने कहा कि यही मूल्य उनकी जीवन यात्रा और न्यायिक सोच की मजबूत नींव बने। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक परंपरा की सराहना करते हुए विद्यार्थियों से नैतिक मूल्यों, संविधान की भावना और न्याय के सिद्धांतों के प्रति सजग रहने का आह्वान किया।

कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने कहा कि एमडीयू ने पिछले पांच दशकों में शिक्षा, अनुसंधान, खेल, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं। उन्होंने कहा कि स्वर्ण जयंती वर्ष केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि आत्ममंथन और भविष्य के लिए नए संकल्प लेने का समय है। विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप बहु विषयक शिक्षा, कौशल विकास, नवाचार और शोध को प्राथमिकता दे रहा है, ताकि विद्यार्थी वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकें।

कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल डिग्रियां प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे जिम्मेदार, संवेदनशील और मूल्यनिष्ठ नागरिक तैयार करना है, जो समाज और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने एलुमनाई को विश्वविद्यालय की गौरवशाली परंपरा का जीवंत प्रतीक बताते हुए कहा कि उनकी उपलब्धियां वर्तमान विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

समारोह के दौरान कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने विश्वविद्यालय की ओर से मुख्य न्यायाधीश को स्मृति-चिह्न और अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शील नागू का भी अभिनंदन किया गया।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विशिष्ट पूर्व छात्रों को न्यायपालिका, विधि व्यवसाय, खेल, साहित्य, लोक संस्कृति, प्रशासन, चिकित्सा, शिक्षा और कॉरपोरेट नेतृत्व सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी, एलुमनाई और शहर के गणमान्य नागरिक समारोह में उपस्थित रहे।

कुलसचिव डॉ. कृष्णकांत ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया, जबकि प्रो. शालिनी सिंह और प्रो. आशीष दहिया ने कार्यक्रम का संचालन किया। निदेशक एलुमनाई रिलेशन्स प्रो. सुमित गिल ने कार्यक्रम का समन्वयन किया। आयोजन में डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर प्रो. सपना गर्ग और निदेशक युवा कल्याण डॉ. प्रताप राठी का विशेष सहयोग रहा। इस कार्यक्रम में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की न्यायाधीश श्रीमती नीरजा कुलवंत कलसन, जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय तेवतिया, सीजेएम डॉ. तरन्नुम खान, डीन, एकेडमिक अफेयर्स प्रो. एससी मलिक, भारतीय पुनर्वास परिषद की पूर्व अध्यक्ष डॉ शरणजीत कौर, पूर्व कुलपति एमडीयू इंजीनियर एच एस चहल, सीबीएलयू, कुलपति डॉ. दीप्ति धर्मानी, कुरुक्षेत्र विवि के कुलपति डॉ सोमनाथ सचदेवा, प्रतिष्ठित शिक्षाविद डॉ. सीता राम व्यास, रविन्द्र सक्सेना समेत विशिष्ट जन, शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी, प्रतिष्ठित एलुमनी, शहर के गणमान्यजन उपस्थित रहे।

न्यायपालिका के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए हाई कोर्ट न्यायाधीशों संजय वशिष्ठ, राजेश भारद्वाज, हरकेश मनुजा, वीरेंद्र अग्रवाल, कुलदीप तिवारी, हरसिमरन सेठी, विकास सूरी, अमन, गुलचंदा को सम्मानित किया गया। बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड चंडीगढ़ के चेयरमैन विजेंद्र गहलावत तथा इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल के वाइस प्रेसिडेंट राजपाल यादव को सम्मानित किया गया। विशिष्ट योगदान के लिए पद्मश्री योगेश्वर दत्त, महाबीर गुड्डू व डॉ. संत राम देसवाल, द्रोणाचार्य अवॉर्डी अरुण दहिया, अर्जुन अवॉर्डी सुनील डबास व राजकुमार सांगवान, सिविल एडमिनिस्ट्रेशन में योगदान के लिए महेंद्र श्योराण, नरहरी बांगड़, मनदीप मान को तथा पुलिस सेवा में योगदान के लिए डॉ. सुमन मंजरी आईपीएस, डॉ. राजश्री आईपीएस तथा राकेश कुमार आर्य आईपीएस को सम्मानित किया गया।

 

चिकित्सा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए डॉ. ध्रुव चौधरी, डॉ. हरप्रीत सिंह, डॉ. मार्कण्डेय आहूजा, डॉ. आदित्य बतरा, डॉ. नवीन मल्होत्रा, डॉ. सुमित सचदेवा, डॉ. शिवकांत को सम्मानित किया गया। शिक्षा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए बीपीएस महिला विवि कुलपति प्रो. सुदेश छिक्कारा, आईजीयू मीरपुर कुलपति डॉ. असीम मिगलानी, पूर्व कुलपति बीपीएस महिला विवि प्रो. आशा कादयान, पूर्व कुलपति सीडीएलयू सिरसा प्रो. विजय कायत को सम्मानित किया गया। लॉ के शेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए पूर्व शिक्षकों प्रो. रणबीर सिंह, प्रो. केपीएस महलवार, प्रो. पीसी जुनेजा, प्रो. प्रीत सिंह, प्रो. अमर वर्मा को सम्मानित किया गया।

बिजनेस एंड लीडरशिप के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए सुधीर जुत्शी, विकास गांधी, नीरज सहगल, अंशुल रूहिल, कर्नल नरेंद्र सिंह, हरविंदर मलिक, राकेश कामरा, सतवंत हुड्डा को तथा युवा एंटरप्रेन्योर के लिए पद्माजय, मनदीप, साहिल, प्रो. आशीष दहिया, प्रो. संदीप मलिक को सम्मानित किया गया। पद्माजय का अवॉर्ड प्रो. शालिनी सिंह ने लिया।

 

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