कानूनों, नियमों और नीतियों का बनेगा डिजिटल भंडार : अनुराग रस्तोगी

हरियाणा सरकार का बड़े पैमाने पर नियामकीय सुधार अभियान 

सभी कानून, अधिसूचनाएं और आदेश होंगे एक केंद्रीकृत प्लेटफॉर्म पर

न्यूज़म ब्यूरो

चंडीगढ़, 10 जून। हरियाणा सरकार ने सुशासन और नियामकीय सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए राज्य के सभी अधिनियमों, नियमों, विनियमों, सरकारी आदेशों, परिपत्रों, अधिसूचनाओं, नीतियों तथा अन्य आधिकारिक दस्तावेजों की ’केंद्रीकृत डिजिटल ऑनलाइन रिपॉजिटरी’ तैयार करने का निर्णय लिया है। साथ ही, विभिन्न विभागों में लागू पुराने, अप्रासंगिक और अनावश्यक कानूनों एवं नियमों की व्यापक समीक्षा प्रक्रिया भी जोर-शोर से चल रही है।

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी द्वारा सभी प्रशासनिक सचिवों को जारी निर्देशों में कहा गया है कि सरकार द्वारा राज्य के सभी राज्य के अधिनियमों, विभागीय नियमों, कार्यकारी आदेशों, परिपत्रों, अधिसूचनाओं तथा नगर निकायों के नियमों सहित सभी महत्वपूर्ण दस्तावेजों के लिए एक केन्द्रीकृत डिजिटल ऑनलाइन रिपॉजिटरी विकसित की जा रही है, जिसमें सर्च ऑप्शन भी होगा।

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यह रिपॉजिटरी राज्य के वैधानिक, नियामकीय और नीतिगत दस्तावेजों के लिए एकीकृत डिजिटल मंच के रूप में कार्य करेगी। दस्तावेजों को क्षेत्रवार, विषयवार तथा अंतिम अद्यतन तिथि के आधार पर वर्गीकृत किया जाएगा, जिससे उपयोगकर्ता प्रमाणिक और नवीनतम जानकारी आसानी से हासिल कर सकेंगे।

इस कार्य को समयबद्ध रूप से पूरा करने के लिए सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने अधीन आने वाले अधिनियमों, नियमों, विनियमों, सरकारी आदेशों, परिपत्रों, अधिसूचनाओं एवं नीतिगत दस्तावेजों की संपादन योग्य (एमएस वर्ड) सॉफ्ट कॉपी तैयार कर 25 जून, 2026 तक उपलब्ध कराएं, ताकि पोर्टल शुरू होते ही इन दस्तावेजों को अपलोड किया जा सके।

डिजिटलीकरण के साथ-साथ राज्य सरकार ने अपने सुधार एजेंडा के प्राथमिकता क्षेत्र-22 के मुताबिक वर्तमान नियामकीय ढांचे की व्यापक समीक्षा भी शुरू कर दी है। विभागों को ऐसे प्रावधानों की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं जो समय के साथ अप्रासंगिक, दोहराव वाले या अनावश्यक रूप से जटिल हो चुके हैं, ताकि उन्हें समाप्त, संशोधित या तर्कसंगत बनाया जा सके।

यह समीक्षा छह प्रमुख सुधार सिद्धांतों के आधार पर की जाएगी, जिनका उद्देश्य अनुपालन संबंधी बोझ को कम करना और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना है। इन सिद्धांतों के तहत केवल उच्च जोखिम वाली गतिविधियों के लिए ही लाइसेंस या पूर्व स्वीकृति की व्यवस्था रखने, अन्य मामलों में स्व-पंजीकरण प्रणाली अपनाने, लाइसेंसों को आजीवन वैधता प्रदान करने, प्रक्रियाओं के बजाय परिणाम-आधारित नियमन को बढ़ावा देने, मान्यता प्राप्त स्वतंत्र थर्ड पार्टी निरीक्षण व्यवस्था को प्रोत्साहित करने तथा जोखिम-आधारित निरीक्षण प्रणाली लागू करने पर विशेष बल दिया गया है। इस पहल से प्रक्रियागत जटिलताओं में कमी आएगी, नियामकीय स्पष्टता बढ़ेगी और शासन व्यवस्था अधिक प्रभावी एवं उत्तरदायी बनेगी।

मुख्य सचिव द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार सभी विभागों को समीक्षा प्रक्रिया पूर्ण कर 3 जुलाई, 2026 तक विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इन रिपोर्टों में संशोधन, निरसन अथवा सरलीकरण के लिए चिन्हित कानूनों एवं नियमों का विवरण तथा राज्य सरकार के सुधार उद्देश्यों के अनुरूप उठाए गए कदमों की जानकारी शामिल होगी।

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