हरियाणा सरकार ने दिए आरटीआई पेनल्टी की समयबद्ध वसूली के आदेश : अनुराग रस्तोगी

न्यूज़म ब्यूरो 

चंडीगढ़, 17 फरवरी : हरियाणा सरकार ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए, हरियाणा सूचना का अधिकार आयोग द्वारा लगाए गए दंड की समयबद्ध वसूली सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी द्वारा सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, बोर्डों एवं निगमों के मुख्य प्रशासकों एवं प्रबंध निदेशकों, मंडल आयुक्तों तथा उपायुक्तों को इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

राज्य सूचना आयोग द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 20(1) के अंतर्गत सूचना उपलब्ध कराने में विलंब के मामलों में दोषी राज्य जन सूचना अधिकारियों (एसपीआईओ) पर प्रति मामले 250 रुपये प्रतिदिन की दर से, अधिकतम 25,000 रुपये तक दंड लगाया जाता है। वर्तमान में विभिन्न विभागों से संबंधित एसपीआईओ पर लगाए गए दंड में से कुल 2,94,87,000 रुपये से अधिक की राशि लंबित है।

सुव्यवस्थित अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने एकमुश्त वसूली के स्थान पर मासिक किस्तों में वसूली की स्वीकृति दी है, ताकि संबंधित अधिकारियों पर अत्यधिक आर्थिक बोझ न पड़े। संबंधित सार्वजनिक प्राधिकरण के आहरण एवं वितरण अधिकारी (डीडीओ) द्वारा संबंधित अधिकारियों के वेतन या पेंशन से मासिक कटौती की जाएगी। क्लास-ए अधिकारियों से सेवा के दौरान 10,000 रुपये प्रतिमाह तथा सेवानिवृत्त होने की स्थिति में 5,000 रुपये प्रतिमाह वसूले जाएंगे। क्लास-बी अधिकारियों से सेवा के दौरान 7,000 रुपये प्रतिमाह तथा सेवानिवृत्त होने पर 3,500 रुपये प्रतिमाह की दर से वसूली की जाएगी। इसी प्रकार क्लास-सी कर्मचारियों से सेवा के दौरान 4,000 रुपये प्रतिमाह तथा सेवानिवृत्त होने पर 2,000 रुपये प्रतिमाह की दर से राशि वसूल की जाएगी। यह प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से लागू होगी और संपूर्ण बकाया राशि की वसूली तक जारी रहेगी।

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निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अगर संबंधित राज्य जन सूचना अधिकारी का निधन हो चुका है, तो अधिनियम के अंतर्गत लगाया गया दंड माफ कर दिया जाएगा तथा किसी प्रकार की वसूली नहीं की जाएगी।

ग्राम पंचायतों के कार्यरत सरपंचों के मामलों में दंड राशि की वसूली उनके मानदेय से 3,000 रुपये प्रतिमाह की दर से की जाएगी। पूर्व सरपंचों के मामले में स्वेच्छा से राशि जमा न कराने की स्थिति में संबंधित विभाग ऐसे मामलों को संबंधित जिला उपायुक्त को भेजेंगे करेंगे, ताकि लागू राजस्व कानूनों अथवा उपयुक्त वैकल्पिक विवाद निवारण तंत्र के अंतर्गत वसूली की कार्रवाई की जा सके। राज्य सूचना आयोग तथा पंचायत एवं विकास विभाग को इन मामलों में आपसी समन्वय से प्रभावी वसूली सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

सभी प्रशासनिक सचिवों एवं विभागाध्यक्षों को अपने-अपने विभागों में इन आदेशों के अनुपालन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने के लिए कहा गया है। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि डीडीओ स्वीकृत वसूली कार्यक्रम का कड़ाई से पालन करें। उन्हें वसूली की प्रगति एवं शेष बकाया राशि से संबंधित सावधि स्थिति रिपोर्ट राज्य सूचना आयोग को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

 

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