हरियाणा में सबूतों के साथ वोट चोरी के खुलासे से डरी बीजेपी ने संसद का सत्र छोटा किया – दीपेन्द्र हुड्डा

चंडीगढ़, 10 नवंबर। सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि हरियाणा में सबूतों के साथ वोट चोरी के खुलासे से डरी बीजेपी ने संसद का सत्र छोटा कर दिया है। 1 दिसंबर से घोषित शीतकालीन सत्र में सिर्फ 15 कार्यदिवस होंगे जो आजादी के बाद आजतक के सबसे छोटे सत्रों में से एक है। उन्होंने कहा कि आज़ादी के शुरुआती दशकों की तुलना में संसद की बैठकें साल दर साल कम होती जा रही हैं, जबकी जनसंख्या और अर्थव्यवस्था के साथ राष्ट्रीय मुद्दे बढ़ रहे हैं। संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है, इसलिए उसकी कार्य दक्षता और जवाबदेही बढ़ाना आवश्यक है। इसलिए वे इसी सत्र में मैं “न्यूनतम सत्र-दिवस” अनिवार्य करने और संसदीय कार्यक्षमता सुधारने हेतु एक Private Member’s Bill पेश करेंगे। इस बिल का उद्देश्य है कि संसद की बैठकें नियमित और सार्थक हों, ताकि जनता से जुड़े मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा सुनिश्चित की जा सके। सत्र की अवधि घटाकर संसद को दरकिनार करने की कोशिश प्रजातंत्र के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं।    
• सत्र की अवधि घटाकर संसद को दरकिनार करने की कोशिश प्रजातंत्र के लिए अच्छे संकेत नहीं – दीपेन्द्र हुड्डा
• “न्यूनतम सत्र-दिवस” अनिवार्य करने और संसदीय कार्यक्षमता सुधारने के लिए लाएंगे प्राइवेट मेम्बर बिल – दीपेन्द्र हुड्डा
 
चंडीगढ़, 10 नवंबर। सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि हरियाणा में सबूतों के साथ वोट चोरी के खुलासे से डरी बीजेपी ने संसद का सत्र छोटा कर दिया है। 1 दिसंबर से घोषित शीतकालीन सत्र में सिर्फ 15 कार्यदिवस होंगे जो आजादी के बाद आजतक के सबसे छोटे सत्रों में से एक है। उन्होंने कहा कि आज़ादी के शुरुआती दशकों की तुलना में संसद की बैठकें साल दर साल कम होती जा रही हैं, जबकी जनसंख्या और अर्थव्यवस्था के साथ राष्ट्रीय मुद्दे बढ़ रहे हैं। संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है, इसलिए उसकी कार्य दक्षता और जवाबदेही बढ़ाना आवश्यक है। इसलिए वे इसी सत्र में मैं “न्यूनतम सत्र-दिवस” अनिवार्य करने और संसदीय कार्यक्षमता सुधारने हेतु एक Private Member’s Bill पेश करेंगे। इस बिल का उद्देश्य है कि संसद की बैठकें नियमित और सार्थक हों, ताकि जनता से जुड़े मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा सुनिश्चित की जा सके। सत्र की अवधि घटाकर संसद को दरकिनार करने की कोशिश प्रजातंत्र के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं।  
 
सांसद ने कहा कि संसद जनता की आवाज़ है। यदि संसद ही कम बैठेगी, तो जनता की आवाज़ कौन उठाएगा? इतने कम सत्र-दिवसों में न तो जनहित के विषयों पर पर्याप्त चर्चा हो पाती है और न ही कानूनों पर गंभीर विचार-विमर्श। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनके प्राइवेट मेम्बर बिल के प्रस्ताव पर दलीय निष्ठा से ऊपर उठकर सभी दलों के सांसद गंभीरता से विचार करेंगे ताकि संसद की गरिमा और कार्यक्षमता दोनों को मज़बूती मिले।
 
दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सारे प्रमाणों के साथ देश के सामने स्पष्ट कर दिया है कि हरियाणा में मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी कर भाजपा ने चुनाव आयोग की मिलीभगत से मतदाता सूची में धांधलेबाजी की गयी। कहीं फर्जी वोट जोड़कर तो कहीं सही वोट काटकर बीजेपी ने हरियाणा में जनभावना के विपरीत सरकार बनाई। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका में नहीं, बल्कि भाजपा के सबसे 'मुख्य पन्ना प्रमुख' का रोल निभाते नजर आ रहे हैं। अगर चुनाव आयोग भाजपा से मिलकर चलेगा तो देश में निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं है। देश की चुनाव प्रक्रिया पर आज गंभीर प्रश्नचिन्ह लग चुका हरियाणा में हुई सत्ता चोरी और वोट चोरी के खिलाफ हम लोकतंत्र बचाने की लड़ाई लड़ेंगे। 
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