हरियाणा सरकार ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं
स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव की अध्यक्षता में हुई एसएचपीपीसी बैठक में 9 Blood Donation Vans के लिए अनुबंध तय किया गया
न्यूज़म ब्यूरो
चंडीगढ़, 30 सितंबर | हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने कई फैसले किए हैं।
Blood Donation Vans के साथ दवाओं और टीकों के सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा।
इसके लिए स्टोरेज रैक और डीजल जनरेटर सेट की खरीद को मंजूरी दी गई है।
इसके अलावा टीबी जांच किट, एंटी-रेबीज वैक्सीन और मेडिकल कंज्यूमेबल्स के लिए भी बड़े बजट को स्वीकृति मिली है।

Blood Donation Vans से आसान होगी सुरक्षित रक्त की उपलब्धता
चंडीगढ़ में स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव की अध्यक्षता में विशेष उच्च अधिकार प्राप्त खरीद समिति की बैठक हुई। इसमें हरियाणा की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए। बैठक में आवश्यक दवाओं, चिकित्सा सामग्री और मरीजों को मिलने वाली सेवाओं की समीक्षा की गई।
रक्तदान और ट्रांसफ्यूजन सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए जिला अस्पतालों के लिए 9 Blood Donation Vans का रेट कॉन्ट्रैक्ट अंतिम रूप दिया गया। इसकी अनुमानित लागत करीब 4.18 करोड़ रुपये है। यह अनुबंध दो साल के लिए रहेगा। इन वैन की मदद से अलग-अलग स्थानों पर रक्तदान शिविर आयोजित किए जा सकेंगे।
Blood Storage व्यवस्था को मिलेगा बेहतर आधार
स्वास्थ्य विभाग ने दवाओं और टीकों के सुरक्षित भंडारण पर भी ध्यान दिया है। इसके लिए 274 स्टार्टर्स और एक्सटेंशन रैक की खरीद के लिए करीब 1.94 करोड़ रुपये का अनुबंध तय किया गया। इससे ड्रग वेयरहाउस में इन्वेंट्री प्रबंधन को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
इसके साथ ही निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए 9 डीजल जनरेटर सेट खरीदे जाएंगे। इनकी क्षमता 50 केवीए होगी। इसके लिए करीब 86.23 लाख रुपये के दो वर्षीय अनुबंध को अंतिम रूप दिया गया है। इससे आवश्यक दवाओं और टीकों के भंडारण की व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
Medical Diagnostics को लेकर भी अहम फैसला

सिविल अस्पताल, करनाल में पीपीपी मोड के तहत सीटी स्कैन और एमआरआई सेवाओं की दरें भी तय की गई हैं। इसका उद्देश्य मरीजों को आधुनिक जांच सुविधाएं उपलब्ध कराना है। बैठक में नेत्र विज्ञान और ईएनटी सेवाओं को उन्नत करने के लिए भी कई उपकरणों की दरें निर्धारित की गईं।
इनमें 6 ऑप्टिकल बायोमीटर, 13 ईएनटी ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप और 6 एडवांस्ड फेकोइमल्सीफिकेशन मशीनें शामिल हैं। इन उपकरणों के लिए कुल अनुमानित लागत करीब 12.22 करोड़ रुपये रखी गई है।
TB Testing को लेकर बढ़ाई जाएगी जांच क्षमता
गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान के लिए टीबी जांच व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा। इसके तहत 1 लाख माइक्रो पीसीआर टीबी टेस्ट किट यानी ट्रूनेट चिप्स के लिए करीब 6.72 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत तय की गई है।
इसके अलावा जिला अस्पतालों में स्थापित पीएसए ऑक्सीजन प्लांट के संचालन और रखरखाव के लिए 8.55 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया। इसका उद्देश्य अस्पतालों में मेडिकल ऑक्सीजन की उपलब्धता को बनाए रखना है।
Essential Medicines की उपलब्धता पर जोर

सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में जरूरी दवाओं और चिकित्सा सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए बड़े बजट को मंजूरी दी गई। नियमित नैदानिक, सर्जिकल और मरीज देखभाल सेवाओं के लिए करीब 132 करोड़ रुपये के मेडिकल कंज्यूमेबल्स निर्धारित किए गए हैं।
सरकारी आयुष सुविधाओं में इलाज कराने वाले मरीजों के लिए करीब 80 करोड़ रुपये की आयुष दवाओं का प्रावधान किया गया। वहीं रेबीज संक्रमण के जोखिम वाले लोगों के उपचार के लिए 12.10 करोड़ रुपये की एंटी-रेबीज वैक्सीन के लिए दरें तय की गईं।
Health Services को मजबूत करने पर सरकार का फोकस

स्कूली बच्चों में एनीमिया की रोकथाम के लिए वीकली आयरन एंड फोलिक एसिड सप्लीमेंट्स की आपूर्ति पर भी करीब 3 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। गर्भवती महिलाओं और अन्य मरीजों में एचआईवी तथा सिफलिस की शुरुआती जांच के लिए 2.10 करोड़ रुपये के ड्यूल किट्स की दरें तय हुईं।
स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने कहा कि इन फैसलों से सरकारी अस्पतालों में दवाओं, टीकों और जांच किटों की उपलब्धता बेहतर होगी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं के ढांचे को और मजबूत करना है।