ट्रैक्टर रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण शुल्क में बढ़ोतरी, कृषि की रीढ़ तोडऩे वाला निर्णय : रतनमान

चंडीगढ़ 22 नवंबर। हरियाणा सरकार द्वारा ट्रैक्टर रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण शुल्क में की गई भारी वृद्धि को लेकर राज्यभर के किसानों में रोष है। किसानों का कहना है कि खेती-किसानी पहले ही महंगी होती जा रही है, ऐसे में ट्रैक्टर जैसे आवश्यक कृषि उपकरण पर इतना अधिक शुल्क लगाने से उनकी आर्थिक स्थिति पर और दबाव पड़ेगा। भारतीय किसान यूनियन ने सरकार के इस निर्णय की कड़े शब्दों में निंदा की है। 
भाकियू ने की हरियाणा में ट्रैक्टर रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण शुल्क में दस गुना बढ़ोतरी की निंदा, किसानों में रोष
 
 
 
चंडीगढ़ 22 नवंबर। हरियाणा सरकार द्वारा ट्रैक्टर रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण शुल्क में की गई भारी वृद्धि को लेकर राज्यभर के किसानों में रोष है। किसानों का कहना है कि खेती-किसानी पहले ही महंगी होती जा रही है, ऐसे में ट्रैक्टर जैसे आवश्यक कृषि उपकरण पर इतना अधिक शुल्क लगाने से उनकी आर्थिक स्थिति पर और दबाव पड़ेगा। भारतीय किसान यूनियन ने सरकार के इस निर्णय की कड़े शब्दों में निंदा की है। 
 
 
भाकियू के प्रदेश अध्यक्ष रतनमान ने कहा कि एक ओर तो सरकार किसानों के लिए तरह-तरह की योजनाएं चलाकर खुद को किसान हितैषी बता रही है वहीं दूसरी ओर इस तरह के निर्णय लेकर किसानों की कमर तोडऩे का काम कर रही है। सरकार का दावा था कि 2024 तक किसानों की आय दोगुनी कर दी जाएगी लेकिन ऐसे निर्णय लेकर सरकार किसानों के हितों पर करारा हमला करने का कार्य कर रही है। 
 
 
एक तरफ किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों की बेहतरी का दावा भी कर रही है, दूसरी तरफ इस तरह से टैक्स बढ़ाकर किसानों को लूटने का काम कर रही है। यदि सरकार सच में किसान हितैषी है तो इस तरह के किसान विरोधी फैसले लेना बंद करे और ट्रैक्टर रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण शुल्क में की गई बढ़ोत्तरी को तुरंत प्रभाव से कम करे। अन्यथा सरकार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
 
 
रतनमान ने कहा कि यह निर्णय किसानों पर न केवल आर्थिक बोझ बढ़ाता है, बल्कि खेतीबाड़ी को हाशिये पर धकेलने जैसा कदम है। पिछले पाँच दशकों में प्रदेश की कृषि उत्पादन क्षमता में जो ऐतिहासिक बढ़ोतरी हुई है, उसका आधार किसानों की मेहनत और कृषि कार्य में लगे ट्रैक्टर जैसे साधन हैं। ट्रैक्टर ही वह शक्ति है जिसने हरियाणा को देश की अन्न भंडारण शक्ति बनाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
 
 
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2020 में ट्रैक्टर रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण के लिए कुल 1080 रुपये का भुगतान करना पड़ता था। इसमें रजिस्ट्रेशन शुल्क, स्मार्ट कार्ड शुल्क, यूजर चार्ज और पोस्टल शुल्क शामिल थे। लेकिन वर्ष 2025 में यही शुल्क बढक़र 10,485 रुपये हो गया है, जिसमें मुख्य रूप से रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण शुल्क को 10,000 रुपये निर्धारित किया गया है। किसानों के अनुसार पांच वर्ष में यह बढ़ोतरी अत्यधिक और असंगत है।
 
 
प्रदेश में अनुचित और अत्यधिक शुल्क वसूली का ताजा मामला यमुनानगर से सामने आया है। यहां की छोटी जोत वाली महिला किसान कृपाल कौर को अपने 20 वर्ष पुराने ट्रैक्टर के रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण के लिए 20 नवंबर 2025 को 10,485 रुपये जमा करवाने पड़े। जबकि अक्तूबर 2020 में इसी ट्रैक्टर का नवीनीकरण मात्र 1,080 रुपये में हुआ था। यानी महज पांच वर्षों में शुल्क में 10 गुना बढ़ोतरी कर दी गई—जो किसी भी रूप में न्यायसंगत नहीं है। एक ही ट्रैक्टर के नवीनीकरण शुल्क में इतनी बड़ी वृद्धि समझ से परे है।
 
 
 
….फैसले को तुरंत वापिस ले सरकार
 
भाकियू प्रदेश अध्यक्ष रतनमान ने कहा कि खेती में ट्रैक्टर का उपयोग लगातार बढ़ रहा है और यह रोजमर्रा के कृषि कार्यों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जमीन की जुताई, बीज बुवाई, ढुलाई और फसल प्रबंधन जैसे कार्य ट्रैक्टर के बिना संभव नहीं होते। ऐसे में ट्रैक्टर रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण शुल्क में दस गुना बढ़ोतरी किसानों को अनावश्यक आर्थिक दबाव में डाल देगी। उन्होंने कहा कि सरकार इस फैसले को तुरंत वापिस ले और शुल्क को कम कर पुराने स्तर के करीब रखे।
 
 
 
इस तरह के निर्णय किसानों की मुश्किलें बढ़ाने वाले : रतनमान
 
रतनमान का कहना है कि सरकार कृषि उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय दोगुना करने के दावे करती है, लेकिन इस तरह के निर्णय किसानों की मुश्किलें बढ़ाने वाले हैं। उन्होंने इसे किसान विरोधी नीतियों का चरम बताते हुए कहा है कि हरियाणा जैसे कृषि प्रधान प्रदेश में इस तरह के फैसले खेती के हितों पर सीधा हमला हैं। बढ़ी हुई फीस से लाखों किसानों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा, खासकर उन छोटे और सीमांत किसानों पर जो पहले ही कर्ज, मौसम और बाजार की मार झेल रहे हैं। 
 
भाकियू राज्य सरकार से मांग करती है कि वह इस निर्णय को तुरंत प्रभाव से वापस ले और किसानों के हित में सरल, कम लागत और सहज नवीनीकरण प्रक्रिया लागू करे। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया तो राज्यभर में किसान संगठनों द्वारा व्यापक आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

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