गीता स्वधर्म को पहचानने का सर्वोत्तम माध्यम : औमप्रकाश धनखड

चंडीगढ़, 01 दिसंबर। तीन दिवसीय जिला स्तरीय गीता महोत्सव-2025 का सोमवार शाम गीतापुरम् (महर्षि दयानंद सरस्वती स्टेडियम) में आध्यात्मिक गरिमा और सांस्कृतिक भव्यता के साथ समापन हुआ। पूरे परिसर में गीता ज्ञान, लोक परंपरा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की दिव्यता एक बार फिर झलकती दिखाई दी। समापन समारोह में पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं भाजपा राष्ट्रीय सचिव औमप्रकाश धनखड़ मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
गीता महोत्सव के समापन पर गीतापुरम् में गूँजा स्वधर्म का संदेश
 
 
तीन दिवसीय महोत्सव बना अध्यात्म और संस्कृति का भव्य संगम
 
 
जीवन को सार्थक बनाना है तो गीता के मार्ग पर चलना होगा- औमप्रकाश धनखड़
 
धनखड़ बोले—ज्ञान योग, कर्म योग और भक्ति योग मिलकर बनाते हैं जीवन का पूर्ण पथ
 
 
चंडीगढ़, 01 दिसंबर। तीन दिवसीय जिला स्तरीय गीता महोत्सव-2025 का सोमवार शाम गीतापुरम् (महर्षि दयानंद सरस्वती स्टेडियम) में आध्यात्मिक गरिमा और सांस्कृतिक भव्यता के साथ समापन हुआ। पूरे परिसर में गीता ज्ञान, लोक परंपरा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की दिव्यता एक बार फिर झलकती दिखाई दी। समापन समारोह में पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं भाजपा राष्ट्रीय सचिव औमप्रकाश धनखड़ मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
 
मुख्य अतिथि ने प्रदर्शनी का रिबन काटकर अवलोकन किया और दीप प्रज्ज्वलित कर समापन समारोह की औपचारिक शुरुआत की। गीतापुरम भक्तिमय वातावरण, श्लोकों की गूँज और दर्शकों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति से पूरी तरह आध्यात्मिक रूप से आलोकित दिखाई दिया। इस अवसर पर जिला अध्यक्ष विकास वाल्मीकि, जिला परिषद चेयरमैन कप्तान सिंह बिरधाना, उपायुक्त स्वप्निल रविंद्र पाटिल की धर्मपत्नी मोहिनी पाटिल की गरीमामयी उपस्थिति रही।
 
 
गीता जीवन में स्वधर्म को पहचानने का माध्यम : औमप्रकाश धनखड़
 
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि औमप्रकाश धनखड़ ने गीता के शाश्वत संदेशों के महत्व को बताते हुए कहा कि गीता केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन का मार्गदर्शक प्रकाश-स्तंभ है, जो हर युग, हर परिस्थिति में मनुष्य को सही दिशा प्रदान करता है। गीता में अनेक ज्ञान धाराएँ संगठित हैं — ज्ञान योग, कर्म योग और भक्ति योग हर मनुष्य की चेतना के स्तर को उठाने का माध्यम हैं।
 
श्री धनखड़ ने कहा कि गीता मनुष्य को उसके स्वधर्म की पहचान कराती है। जीवन में हमें किस दिशा में आगे बढ़ना है, यह स्पष्ट संकेत गीता देती है। उन्होंने सुंदर उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे किसी चिट्ठी को सही स्थान पर पहुँचने के लिए पते की आवश्यकता होती है, वैसे ही जीवन को सार्थक बनाने के लिए गीता दिशा देती है कि किस मार्ग पर चलकर जीवन पूर्ण होगा, इसका ज्ञान गीता ही देती है। उन्होंने कहा कि स्वधर्म के मार्ग पर चलकर ही मनुष्य अपने जीवन का मूल लक्ष्य पहचान सकता है।
 
 
समापन दिवस पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की छटा, प्रदर्शनी रही आकर्षण का केंद्र
 
समापन समारोह में दिन भर चलीं सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। विभिन्न कलाकारों और सांस्कृतिक दलों ने गीता संदेश पर आधारित नृत्य, भजन और नाट्य मंचन कर गीतापुरम् में आध्यात्मिक उमंग भर दी। प्रदर्शनी में विभिन्न विभागों और सामाजिक संस्थाओं द्वारा लगाए गए स्टॉलों ने गीता दर्शन, सरकारी योजनाओं और विभिन्न सामाजिक विषयों पर जानकारी प्रस्तुत की।
 
 
गीता पर आधारित भव्य नगर शोभायात्रा ने पूरे शहर को किया अध्यात्ममय
समापन दिवस पर गीता महोत्सव का विशेष आकर्षण रही नगर शोभायात्रा, जिसने पूरे शहर को आध्यात्मिक रंगों से सराबोर कर दिया। नगर परिषद चेयरमैन जिले सिंह सैनी ने शहीद कुलदीप चौक पर हरी झंडी दिखाकर शोभायात्रा को रवाना किया।
 
बीन-नगाड़ों की थाप, ढोल-ताशों की गूंज, कच्ची घोड़ी पार्टी, झांकियों में प्रदर्शित गीता के प्रसंग, राधा-कृष्ण लीलाएं, और पारंपरिक लोक नृत्यों ने शोभायात्रा को दर्शनीय और प्रेरणादायक बना दिया। शहर के मुख्य बाज़ारों से गुजरती हुई यह शोभायात्रा जब गीतापुरम् पहुंची तो वातावरण भक्ति, उल्लास और सांस्कृतिक गर्व से भर उठा।
 
नागरिकों ने रास्ते भर शोभायात्रा का स्वागत किया और गीता के संदेशों को आत्मसात करने का संकल्प लिया। यह आयोजन गीता महोत्सव की आध्यात्मिक महत्ता को और भी गहरा करने वाला साबित हुआ।
 
जिले के सभी स्कूलों में गूँजे गीता के श्लोक
गीता महोत्सव के अंतिम दिन गीतापुरम व जिलेभर के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में गीता श्लोकोच्चारण का आयोजन किया गया। कुरुक्षेत्र से सीधे लाइव आयोजित श्लोकाच्चारण के साथ विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से गीता के अध्यायों के चयनित श्लोकों का उच्चारण किया, जिससे शिक्षण संस्थानों में दिव्यता, अनुशासन और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों की खूबसूरत झलक दिखाई दी। शिक्षकों और छात्रों ने गीता के संदेशों को जीवन में अपनाने का संकल्प लेते हुए इसे अपने लिए एक प्रेरणादायक अनुभव बताया।
 
 
….इस मौके पर ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष विकास वाल्मीकि, जिप चेयरमैन कप्तान बिरधाना,वरिष्ठ भाजपा नेता संजय कबलाना व दिनेश कौशिक, नप चेयरमैन जिले सिंह सैनी, पूर्व चेयरमैन करमबीर राठी, आनंद सागर, मनीष बंसल,प्रवीण जांगडा,सहित नगर पार्षद ,श्रद्धालु, शिक्षक,छात्र, कलाकार और बड़ी संख्या में जिलावासी मौजूद रहे।
 
वहीं प्रशासन की ओर से डीसी स्वप्निल रविंद्र पाटिल की धर्मपत्नी मोहिनी स्वप्निल रविंद्र पाटिल,एडीसी जगनिवास, एसडीएम झज्जर अंकित कुमार चौकसे, एसडीएम बादली डॉ रमन गुप्ता, अधीक्षण अभियंता सतीश जनावा,जिला सूचना एवं जनसमपर्क अधिकारी सतीश कुमार,सहायक जिला सूचना एवं जनसमपर्क अधिकारी डॉ मनप्रीत सिंह सहित विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।
 
 

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