चुनाव जीतने के बाद भाजपा ने 12 लाख से अधिक काटे गरीबों के राशन कार्ड| भाजपा ने चुनाव से पहले बनाए बीपीएल कार्ड, अब काटकर किया गरीबों के साथ ‘विश्वासघात’: आदित्य सुरजेवाला

विधानसभा बजट सत्र में अपने अभिभाषण में विधायक आदित्य सुरजेवाला ने लगाया भाजपा सरकार पर गरीबों के साथ “अन्याय” का आरोप

न्यूज़म ब्यूरो 

चंडीगढ़, 25 फ़रवरी 2026 : कैथल विधायक आदित्य सुरजेवाला ने हरियाणा की भाजपा सरकार पर गरीबों के साथ बड़ा अन्याय करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने विधानसभा बजट सत्र में अपने अभिभाषण के दौरान मुख्यमंत्री नायब सैनी व भाजपा सरकार पर हमला बोला। 

 

उन्होंने कहा कि भाजपा ने चुनावी लाभ के लिए गरीबों को राशन की बरसात की, लेकिन अब उनकी थाली छीन ली। क्या 10 महीनों में गरीबी 24% कम हो गई? या गरीबों को ही सिस्टम से बाहर कर दिया गया? उन्होंने इसे “गरीबों के साथ विश्वासघात” करार दिया और पूछा कि एससी/एसटी/बीसी, मजदूर, विधवाओं और अनाथों के कार्ड क्यों काटे गए, जबकि कई मामलों में गलत डेटा (जैसे महंगी गाड़ी या जमीन) डालकर पात्रता खत्म की गई। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा प्रदेश में राशन कार्डों में भारी कटौती की गई है, जिससे लाखों गरीब परिवारों की खाद्य सुरक्षा पर सीधा हमला हुआ है।

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आदित्य सुरजेवाला ने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि जनवरी 2024 में हरियाणा में कुल 44,99,450 बीपीएल/एएवाई राशन कार्ड थे, जो दिसंबर 2024 तक बढ़कर 51,86,161 हो गए और मार्च 2025 में चरम पर पहुंचकर 52,50,740 हो गए। लेकिन इसके बाद मात्र 10 महीनों में यह संख्या घटकर जनवरी 2026 तक 39,88,155 रह गई। यानी 12,62,585 राशन कार्ड समाप्त कर दिए गए, जो लगभग 24% की कटौती है।

 

आदित्य सुरजेवाला ने इसे “चौंकाने वाली सच्चाई” बताते हुए कहा कि केवल अप्रैल 2025 में ही 3,35,095 बीपीएल कार्ड रद्द किए गए, जबकि मई से अगस्त 2025 के बीच अतिरिक्त 7,89,826 कार्ड रद्द हुए। 

 

उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या 10 महीनों में हरियाणा से गरीबी 24% कम हो गई? या सरकार ने गरीबों को ही ‘सिस्टम’ से बाहर कर दिया? भाजपा द्वारा हमेशा से ही वोटों के लिए गरीबों के अधिकारों और हकों पर आक्रमण किया है। मजदूरों के घरों में नोट छपने लगे?

 

विधायक आदित्य सुरजेवाला ने पीपीपी को “परिवार परेशान पत्र” बताते हुए कहा कि यह गरीबों को सिस्टम से बाहर करने का हथियार बना है। सरकार कहती है पीपीपी से ऑटोमैटिक एलिजिबिलिटी तय होती है, लेकिन वास्तव में गरीबों के कार्ड काटे जा रहे हैं। कई मामलों में एससी/बीसी परिवारों, मजदूरों, विधवाओं, अनाथों के कार्ड काटे गए, जबकि उनके पीपीपी में गलत जानकारी (जैसे महंगी गाड़ियां या जमीन) डाल दी जाती है।

 

यह कटौती राज्यव्यापी है, कोई जिला इससे अछूता नहीं रहा। 

 

हरियाणा के प्रत्येक जिलों में अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 तक( सिर्फ़ 10 महीने में ही 12,62,585) काटे गए कार्ड…

 

        * फरीदाबाद: 1,26,564 कार्ड 

        * गुरुग्राम: 88,772 कार्ड 

        * पानीपत : 64,301 कार्ड 

        * सोनीपत : 71,625 कार्ड 

        * हिसार: 77,350 कार्ड 

        * सिरसा: 70,420 कार्ड 

        * जींद : 49,527 कार्ड 

        * करनाल: 70,260 कार्ड 

        * फतेहाबाद : 46,071 कार्ड 

        * भिवानी : 50,808 कार्ड 

        * झज्जर : 49,280 कार्ड 

        * रेवाड़ी : 44,673 कार्ड 

        * पलवल : 46,304 कार्ड 

        * कैथल : 51,716 कार्ड 

        * महेंद्रगढ़ : 43,028 कार्ड 

        * अंबाला – 58,835 कार्ड 

        * चरखी दादरी- 23,694 कार्ड 

        * कुरुक्षेत्र – 52,379 कार्ड 

        * मेवात -40,647 कार्ड 

        * पंचकूला-28,156 कार्ड 

        * रोहतक- 50,075 कार्ड 

        * यमुनानगर – 58,100 कार्ड 

 

सरकार की तरफ़ से जवाब है कि यह पारिवारिक पहचान पत्र (पीपीपी) के आधार पर ऑटोमैटिक होता है, जहां पात्रता स्वतः तय होती है और कोई आवेदन लंबित नहीं रहता। 

 

लेकिन सुरजेवाला ने इसका विरोध करते हुए कई सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जब 12 लाख 62 हज़ार 585 कार्ड स्वतः समाप्त हुए, तो कितने परिवारों को नोटिस दिया गया? कितनों ने अपील की? कितनों को बहाल किया गया? यह गरीब माँ की रसोई, बच्चे के भविष्य और मजदूर की उम्मीद से जुड़ा मामला है।

 

उन्होंने कहा कि विधानसभा में दिए गए आंकड़ों में इन सवालों का कोई जवाब नहीं है। राशन कार्ड सिर्फ कागज नहीं, बल्कि परिवार की थाली, बच्चों के पोषण और गरीब की रसोई का आधार है। इस कटौती से लाखों परिवारों की खाद्य सुरक्षा पर सीधा प्रहार हुआ है।

 

आदित्य सुरजेवाला ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि 2024 में जो 6 लाख 86 हज़ार 711 नए कार्ड जोड़े गए, वो भाजपा ने चुनावी लाभ के लिए इस्तेमाल किए लेकिन 2025 में जो 12.62 लाख कार्ड काटे गए, वे अन्यायपूर्ण हैं। सत्ता हासिल करने के लिए किया गया गरीबों के साथ ये अन्याय बर्दाश्त नहीं है।

 

आदित्य सुरजेवाला ने भाजपा सरकार व मुख्यमंत्री नायब सैनी से माँग करते हुए कहा कि अप्रैल 2025 की कटौती पर विस्तृत श्वेत पत्र जारी किया जाए। जिला-वार अपील एवं बहाली का डेटा सार्वजनिक किया जाए। पीपीपी-पीडीएस एकीकरण की स्वतंत्र ऑडिट कराई जाए। जिन परिवारों के कार्ड समाप्त हुए, उनकी सामाजिक-आर्थिक समीक्षा कराई जाए।

 

उन्होंने कहा कि गरीबों का राम भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। डिजिटल शासन का मतलब गरीबों को चुपचाप बाहर करना नहीं है।क्या गरीबी घटी है, या गरीबों को ही घटा दिया गया है?

 

आदित्य सुरजेवाला ने सरकार पर लोकतंत्र दबाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने चंडीगढ़ में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था, लेकिन हरियाणा भर में कांग्रेस नेताओं को घरों से उठाया गया, रास्तों में रोका गया, धमकियाँ दी गईं, गिरफ्तारियाँ हुईं और नोटिस जारी किए गए। 

 

आदित्य ने मुख्यमंत्री नायब सैनी से सवाल करते हुए कहा कि एक शांतिपूर्ण जुलूस से सरकार को इतना डर क्यों? यह संविधान पर हमला है। बाबासाहेब आंबेडकर ने हमें फ्रीडम ऑफ स्पीच और राइट टू प्रोटेस्ट दिया, जो किसी सरकार की दया नहीं है। जो इसे कुचले, वह तानाशाही है।

 

उन्होंने जोर देकर कहा कि वे जेल जाने से नहीं डरते। चाहे लाठी पड़े, चाहे हथकड़ी लगे — गरीब की आवाज, माँ की रसोई, एससी/एसटी/बीसी के हक और युवाओं के सपनों के लिए हम लड़ते रहेंगे। आवाज बंद नहीं होगी।

 

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