किसान रजिस्ट्री और डिजिटल क्रॉप सर्वे के लिए राज्य भर की तैयारियों की समीक्षा कर रही हैं डॉ. सुमिता मिश्रा

 

चंडीगढ़, 12 दिसंबर : हरियाणा कृषि क्षेत्र में एक ऐतिहासिक डिजिटल बदलाव की तैयारी कर रहा है। राज्य सरकार किसान-रजिस्ट्री (एग्रीस्टैक) और डिजिटल क्रॉप सर्वे (DCS) की शुरूआत के लिए सभी प्रमुख कदमों को अंतिम रूप दे रही है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्त आयुक्त, डॉ. सुमिता मिश्रा ने आज इसकी प्रगति की समीक्षा की। 

डॉ. मिश्रा ने बताया कि विभाग हरियाणा के लगभग 1.78 करोड़ भूमि खंडों पर टीमों को सक्रिय करने के लिए पूरी तरह तैयार है, जो देश के सबसे बड़े डिजिटल कृषि अभियानों में से एक है। हरियाणा सरकार ने किसान-रजिस्ट्री कैंप 1 जनवरी 2026 से और डिजिटल क्रॉप सर्वे 1 फरवरी 2026 से शुरू करने का कार्यक्रम तय किया है। उन्होंने कहा कि ये दोनों पहलें हरियाणा के एग्रीस्टैक विज़न की आधारशिला हैं, जिसका उद्देश्य किसानों और उनकी फसलों का एकीकृत, सटीक और पारदर्शी डेटा आधार तैयार करना है।

बैठक के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण कार्यों को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि विभाग 9 दिसंबर को ही सभी आवश्यक डेटा केंद्रीय प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (CPMU) के साथ साझा कर चुका है और जिसमें बकेटिंग प्रक्रिया अभी उक्त यूनिट स्तर पर लंबित है। इसे पंचकूला जिले के लिए 16 दिसंबर तक पूरा किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि डिजिटल क्रॉप सर्वे पोर्टल अभी तक चालू नहीं हुआ है और केंद्रीय प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट से आग्रह किया कि पोर्टल की स्थिति और अपलोड किए गए सर्वे डेटा की अद्यतन जानकारी तुरंत साझा की जाए, ताकि 1 फरवरी की अंतिम तिथि तक बिना किसी देरी के पूरी की जा सके।

उन्होंने यह भी कहा कि किसान-रजिस्ट्री पोर्टल 17 दिसंबर तक पूर्ण रूप से कार्यात्मक होना चाहिए, जबकि तीन प्रमुख एप्लिकेशन—भूमि सत्यापन, किसान पंजीकरण और रजिस्ट्रेशन—20 दिसंबर तक सुरक्षा ऑडिट पूरा कर ऐप स्टोर पर उपलब्ध करा दिए जाने चाहिए। साथ ही, सर्वे ऑफ इंडिया को शेष गांवों की ज्योमेट्री मैपिंग 16 दिसंबर तक जमा करने के निर्देश दिए।

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डॉ. मिश्रा ने स्पष्ट किया कि किसान-रजिस्ट्री सीधे पीएम-किसान योजना से जुड़ी होगी, इसलिए किसान पंजीकरण के लक्ष्यों को समय पर पूरा करना अनिवार्य है। अपनी समीक्षा में उन्होंने प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक राज्य परियोजना प्रबंधन इकाई (SPMU) की स्थापना को भी अनिवार्य बताया। इसके अलावा उन्होंने कृषि विभाग को निर्देश दिया कि फील्ड स्टाफ जैसे पटवारी, कृषि पर्यवेक्षक और अन्य टीमों तथा किसानों को सहायता प्रदान करने के लिए तुरंत एक समर्पित हेल्प डेस्क स्थापित किया जाए।

उन्होंने समयबद्ध कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत निगरानी तंत्र भी प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि कार्य की प्रगति की साप्ताहिक समीक्षा उपायुक्तों द्वारा, जबकि भूमि अभिलेख निदेशक और कृषि निदेशक द्वैमासिक समीक्षा करेंगे। राज्य स्तर पर वित्त आयुक्त और कृषि विभाग के प्रधान सचिव मासिक समीक्षा करेंगे। 

कार्यान्वयन एजेंसियों के बीच समन्वय को सुदृढ़ करने के लिए, डॉ. मिश्रा ने राजस्व विभाग और सर्वे ऑफ इंडिया की संयुक्त बैठक आयोजित करने का प्रस्ताव रखा। यह बैठक लंबित तकनीकी कार्यों, मानचित्र संबंधी मुद्दों और फील्ड-स्तर की तैयारियों का समाधान सुनिश्चित करेगी, जिससे परियोजना बिना किसी बाधा के आगे बढ़ सके। 

डॉ. मिश्रा ने इस पहल को “डेटा-आधारित कृषि की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम” बताते हुए कहा कि हरियाणा तकनीक के माध्यम से कृषि को आधुनिक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि समय-सीमाओं, विभागीय समन्वय और मजबूत डिजिटल ढांचे के साथ, हरियाणा पारदर्शी, कुशल और किसान-केंद्रित शासन का राष्ट्रीय मॉडल बनने की दिशा में अग्रसर है। आने वाले किसान रजिस्ट्री और डिजिटल क्रॉप सर्वे अभियानों से सेवाओं की आपूर्ति, फसल आकलन की सटीकता और सरकारी योजनाओं तक समयबद्ध पहुंच में उल्लेखनीय सुधार होगा जिससे राज्य के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।

 

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