पूरे देश में लोकतंत्र का गला घोंटकर चल रही है सरकार : दीपेन्द्र हुड्डा

गुरुग्राम के दोनों जिलाध्यक्षों समेत हिरासत में लिए गए सभी साथियों पर से मुकदमे वापस ले सरकार – दीपेन्द्र हुड्डा

प्रजातंत्र में विरोध करने का संवैधानिक अधिकार है– दीपेन्द्र हुड्डा

किसान हो या मजदूर, व्यापारी हो या कर्मचारी हो हर वर्ग सरकार से नाराज है, लेकिन सरकार में बैठे लोग सत्ता के नशे में चूर होकर हर वर्ग की आवाज दबाना चाहते हैं – दीपेन्द्र हुड्डा

न्यूज़म ब्यूरो

गुरुग्राम, 22 अगस्त। सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने आज गुरुग्राम में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि पूरे देश में लोकतंत्र का गला घोंटकर सरकार चल रही है। पूरे देश ने देखा था कि दिल्ली के जंतर-मंतर युवाओं द्वारा अपनी माँग उठाने पर उनके संवैधानिक अधिकार का हनन किया गया। उन पर पुलिस बर्बरता की गई। वही काम गुड़गाँव में जंतर-मंतर पार्ट-2 के तौर पर पुलिस प्रशासन ने कल करके दिखाया है। प्रजातंत्र में विरोध करने का संवैधानिक अधिकार है। किसान हो या मजदूर, व्यापारी हो या कर्मचारी हो हर वर्ग सरकार से नाराज है, लेकिन सरकार में बैठे लोग सत्ता के नशे में चूर होकर हर वर्ग की आवाज दबाना चाहते हैं। लेकिन उनको सोचना चाहिए कि देश का युवा अब जागरूक हो गया है और वो सरकारी अत्याचार के आगे झुकने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि काले झंडे दिखाना ऐसा कौन सा अपराध है कि 17 पुलिसकर्मी, 2 SHO सस्पेन्ड हो गए, 19 साथियों के खिलाफ गैर-कानूनी हिरासत में लेने कार्रवाई की गई है। उन्होंने मांग करी कि दोनों जिलाध्यक्षों समेत गैर-कानूनी हिरासत में लिए गए साथियों पर से मुकदमे वापस ले। बीजेपी सरकार और प्रशासन इसके लिए माफी मांगे।

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दीपेन्द्र हुड्डा ने बताया कि कल कांग्रेस के साथियों ने मुख्यमंत्री जी के काफ़िले को काले झंडे दिखाये थे क्योंकि गुड़गाँव की जिस यूनिवर्सिटी में मुख्यमंत्री जा रहे थे वहाँ छात्रों की बहुत सारी समस्याएँ थी जिसका समाधान करने की वो मांग कर रहे थे। छात्रों की शिकायत थी कि यूनिवर्सिटी में फर्स्ट ईयर का रिज़ल्ट नहीं आया, इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी है। गुड़गाँव में प्रशासन जिस अलोकतांत्रिक तरीके से निजी संपत्तियों को तोड़ने का काम कर रही है और प्रशासन का माफिया रूप देखने को मिल रहा है, उस बात को लेकर भी लोगों में रोष था। इसके अलावा छात्रों में इस बात को लेकर भी रोष था कि जंतर मंतर पर जो पुलिस बर्बरता हुई उस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई, एफआईआर तक दर्ज नहीं की जा रही थी। जब लोक सभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जी ने साढ़े 7 घंटे तक एफआईआर दर्ज करने की मांग करते हुए धरना दिया तब जाकर एफआईआर दर्ज हुई। इस माँग को लेकर कांग्रेसजनों ने काले मुख्यमंत्री को काले झंडे दिखाए।

सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने काले झंडे दिखाने के बाद हुई पुलिस बर्बरता की निंदा करते हुए कहा कि जिस तरह पुलिस ने कायराना ढंग से कार्रवाई की वो पूरे गुड़गाँव के इतिहास में काला इतिहास बना है। पुलिस ने सीआईए की अलग-अलग टीम लगाकर पूरे गुड़गाँव में एक-एक कांग्रेस जन को उठाने का काम किया जो वहाँ पे मौजूद था। गुरुग्राम शहर कांग्रेस के जिलाध्यक्ष पंकज डाबर के बेटे को उठा लिया। एनएसयूआई के ज़िलाध्यक्ष सचिन के पिता को उठा लिया और प्रताड़ित किया गया। इसके बाद पुलिस ने सारी रात उन्हें थाने में बिना मुकदमा दर्ज किये उन्हें कस्टडी में रखा। संगीन अपराध के मामलों में पुलिस कस्टडी में रखा जाता है। रात में उनके साथ पुलिस ने हाथापाई और और मारपीट भी की। ग़ैर-क़ानूनी गिरफ़्तारी के बाद उनके साथ पुलिस ने उनके साथ बर्बरता की। उनके परिवारों को परेशान किया और उनके प्रतिष्ठानों को निशाने पर लिया। उन्होंने सवाल किया कि क्या देश में संविधान, न्यायपालिका है कि नहीं है? कुछ एक अफसरों ने क़ानून, संविधान की सीमाओं को लांघकर कार्रवाई की।

एक सवाल के जवाब में सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि कुछ लोग सिख समाज और हमारे बीच के भाईचारे को कमजोर करके राजनीति करना चाहते हैं। ऐसे लोग मेरे शब्दों को तोड़-मरोड़ कर और मेरे बयान को बढ़ा-चढ़ा कर पेश करने का प्रयास कर रहे हैं। सबसे पहली बात तो ये शब्द का प्रयोग मैंने किया ही नहीं। ना ये शब्द का प्रयोग किया, ना कोई ऐसी भावना थी और ना हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि सिख समाज के साथ हमारा पीढियों का भाईचारा है और हमारे परिवार का भी सिख समाज के साथ हर सुख-दुख में नाता रहा है, हर संघर्ष में हमने साथ दिया है। 1908 में जब पंजाब में ‘पगड़ी संभाल जट्टा’ आंदोलन हुआ, तो शहीद-ए-आज़म भगत सिंह जी के चाचा जी सरदार अजीत सिंह जी के साथ मेरे परदादा चौधरी मातू राम जी को काले पानी की सज़ा हुई थी। किसान आंदोलन के समय जब इतना बड़ा अत्याचार हुआ, साढ़े सात सौ किसानों ने शहादत दी, उस समय भी सबसे पहले हमने आकर साथ निभाने का कार्य किया। 84 के दंगों में बहुत बड़ा अन्याय हुआ और जो भी कोई दोषी है, उसे कड़ी से कड़ी सज़ा होनी चाहिए, सिख भाइयों को न्याय मिलना चाहिए। और यही शुरू से लेकर आखिर तक हमारा स्टैंड रहा है।

इस अवसर पर प्रमुख रूप से विधायक रघुबीर तेवतिया, विधायक इंदुराज नरवाल, पूर्व मंत्री सुखबीर कटारिया, सुमित्रा चौहान, सुधीर सिंह, मुकेश, राव नरबीर, एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष अविनाश यादव, इंटक के प्रदेश अध्यक्ष अमित यादव, जिला प्रधान पंकज डाबर के पिताजी, ब्लॉक अध्यक्ष अमित कोचर, सुनीता सेहरावत, अमित, अभिषेक यादव, सुशील सेहरावत, गजेन्द्र, सुखबीर सिंह तंवर, राजकुमार, पवन चौधरी, अरुण शर्मा, सतीश बंधु, देवेन्द्र भाटिया, मुकेश चौधरी आदि मौजूद रहे।

 

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