HKRN के तहत लगे कर्मियों को पक्का करे सरकार, गरजे पूर्व CM, कांग्रेसी MP-MLA

कौशल कर्मियों के समर्थन में हरियाणा कांग्रेस के वरिष्ठ नेतों ने कार्यकर्ताओं संग किया बड़ा धरना-प्रदर्शन

न्यूज़म ब्यूरो

पंचकूला, 19 अगस्त। कांग्रेस ने कौशल रोजगार निगम के तहत लगे तमाम कर्मियों को पक्का करने की मांग को लेकर आज बड़ा धरना प्रदर्शन किया। हजारों की तादाद में HKRN कार्यालय पहुंचे कांग्रेसजनों को पुलिस ने बैरीकेटिंग लगाकर रोक लिया, जहां उन्होंने जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगों को उठाया। बीजेपी सरकार जवाब दो, जवाब दो! HKRN का हिसाब दो, हिसाब दो! के जोरदार नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। प्रदर्शन का नेतृत्व पार्टी के पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा और प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र ने किया। इस मौके पर पार्टी के सांसद दीपेंद्र हुड्डा, सांसद वरुण मुलाना, सांसद सतपाल ब्रम्हचारी, सांसद कर्मवीर बौद्ध, आयोजक चन्दरमोहन, संयोजक अशोक अरोड़ा वीरेंदर सिंह, उदयभान, कुलदीप शर्मा, डिप्टी लीडर आफताब अहमद समेत सभी विधायक, पूर्व सांसद, पूर्व विधायक, वरिष्ठ नेता व हजारों कार्यकर्ता मौजूद रहे।

इस मौके पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छात्रों की गूंज के माध्यम से युवाओं और छात्रों को न्याय दिलाने का जो रास्ता दिखाया है उसी कड़ी में आज हरियाणा में कांग्रेस पार्टी प्रदेश के युवाओं के साथ हो रहे अन्याय और शोषण के खिलाफ खड़ी है। HKRN के जरिए बीजेपी सरकार युवाओं का युवाओं का शोषण कर रही है। हमारी मांग है कि HKRN से लगे सभी कर्मचारियों को सरकारी नौकरी में पक्का किया जाए और उन्हें समान पे-स्केल, DA, प्रमोशन, आरक्षण व रिटायरमेंट लाभ दिए जाएं। साथ ही भविष्य में तमाम नियुक्तियां पक्की भर्ती के तहत की जाएं।

हुड्डा ने कहा कि सरकार का काम पक्की भर्तियां करना होता है, लेकिन बीजेपी सरकार राजपत्रित पदों को भी HKRN के जरिये भरकर ठेका प्रथा को बढ़ावा दे रही है। इसके जरिए अप्रत्यक्ष तौर पर दलित-पिछड़े व गरीबों का आरक्षण भी खत्म किया जा रहा है।

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पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान सरकारी पदों की संख्या को बढ़ाकर 4 लाख किया गया था, ताकि ज्यादा से ज्यादा युवाओं को रोजगार मिल सकें और लोगों को बेहतर सरकारी सेवाएं मिल सकें। लेकिन, बीजेपी ने इस संख्या को घटाकर मात्र ढाई लाख कर दिया और हरियाणा को बेरोजगारी का सिरमौर बना दिया है। जब तक सरकार पदों की संख्या को बढ़ाकर वापिस 4 लाख नहीं करती और कौशल कर्मियों को पक्का नहीं करती, तब तक कांग्रेस का संघर्ष जारी रहेगा।

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस कोई नई मांग नहीं कर रही है, बल्कि खुद भाजपा ने विधानसभा चुनाव में कच्चे कर्मचारियों का वोट लेने के लिए 1,25,000 कौशल कर्मियों को पक्का करने का ऐलान किया था। इसके लिए बाकायदा अधिसूचना जारी करने का भी ड्रामा रचा गया। सरकार ने 15 अगस्त 2024 को, ठीक चुनाव से ठीक पहले, नोटिफिकेशन जारी किया था। लेकिन लगभग 2 साल बाद भी, आज तक इन कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने का कोई कानून या आधिकारिक पत्र नहीं मिला है। इसी वजह से इन तमाम कर्मचारियों के सिर पर हमेशा नौकरी जाने का खतरा मंडराता रहता है। आए दिन किसी न किसी बहाने से सरकार इन कौशल कर्मियों को नौकरी से निकालती रहती है।

भाजपा ने चुनाव के दौरान इन कर्मचारियों और उनके परिवारों के बीच भ्रम फैलाया था। भाजपा ने यह झूठ बोला कि कांग्रेस सरकार आने पर इन कर्मियों को नौकरी से हटा दिया जाएगा। जबकि कांग्रेस उस समय भी और आज भी ये मांग करती है कि इन कर्मियों को पक्का किया जाए। इनके वेतन में बढ़ोत्तरी हो। बीजेपी ने झूठ का सहारा लेते हुए इन कर्मचारियों को जॉब सिक्योरिटी देने का ऐलान भी किया था। इसी भरोसे पर इन 1,25,000 कर्मचारियों और उनके ज्यादातर परिवारों ने भाजपा को वोट दिया। परंतु, झूठ बोलकर वोट लेने वाली भाजपा का सच, चुनाव के बाद सबके सामने उजागर हो गया। सच ये है कि कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने की बीजेपी सरकार की कोई मंशा ही नहीं है।

प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र ने कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान बनी कच्चे कर्मियों को पक्का करने वाली नियमितीकरण की नीति पर कुछ दिन पहले ही हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मुहर लग चुकी है। कांग्रेस सरकार की उस नीति को अदालत ने पूरी तरह वैध माना है। इस नीति से गेस्ट टीचर्स समेत हजारों कच्चे कर्मचारियों को लाभ मिला है। लेकिन, भाजपा अपने साढ़े 11 साल के शासनकाल में आज तक नियमितीकरण की कोई ऐसी नीति नहीं बना सकी। इसका खामियाजा इन कच्चे कर्मचारियों और उनके परिवारों को भुगतना पड़ रहा है।

कौशल निगम शिक्षित व योग्य युवाओं को कम मजदूरी पर अस्थायी तौर पर सरकार के विभागों, बोर्ड आदि को ठेके पर मुहैया करवाने की व्यवस्था है। यह एक तरह का डिजिटल लेबर एक्सचेंज है। कौशल निगम गरीब व शिक्षित युवाओं की मजदूरी का व्यापार करता है और उनकी मजदूरी का 1 प्रतिशत वसूल भी करता है। ये सरकार की एक शर्मनाक साजिश है कि वह अपने युवाओं का न सिर्फ शोषण करती है, बल्कि उनकी मजदूरी में से भी 1 प्रतिशत हिस्सा लेती है।

कौशल निगम के माध्यम से सरकारी विभागों में भेजे गए अनुबंधित लोग सरकारी कर्मचारी नहीं माने जाते, बल्कि कौशल निगम के मजदूर माने जाते हैं। कौशल निगम के साथ ठेके पर लगे कर्मचारी बहुत कम मजदूरी में रिटायरमेंट की उम्र तक काम करेंगे। यानी वे दो जून की रोटी से आगे कभी सोच भी नहीं पाएंगे। यह हरियाणा के युवाओं को सामाजिक और नागरिक के तौर पर दरिद्र बनाने की बहुत बड़ी साजिश है।

सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि HKRN के जरिए लगे युवाओं को सरकार कर्मचारी ही नहीं मानती। सरकार बोलती है कि इन्हें ‘एम्प्लॉय’ नहीं, ‘डिप्लॉय’ किया हुआ है। उन्होंने मांग करी कि HKRN में युवाओं का शोषण बंद हो, HKRN से भर्ती सभी कर्मचारियों को सरकारी नौकरी में पक्का किया जाए। आने वाले समय में HPSC, HSSC, SSC आदि के जितने पदों पर भी भर्तियाँ हों वो सारी परमानेंट भर्ती हो। जिसमें रिज़र्वेशन का ख्याल रखा जाए, बाकी प्रावधानों का ख्याल रखा जाए।

उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार NFS यानी ‘नॉट फाउंड सूटेबल’ के नाम पर हरियाणा के एससी वर्ग, ओबीसी वर्ग के बच्चों के साथ अन्याय कर रही है। उन्हें मिलने वाले आरक्षण को पिछले दरवाजे से खत्म करके उनके हक की सारी सीटें खाली छोड़ी जा रही है। दीपेन्द्र हुड्डा ने HKRN दफ़्तर के आगे खड़े होकर कहा कि हरियाणा में अगर कोई नॉट फाउंड सूटेबल है, तो बीजेपी की नायब सरकार नॉट फाउंड सूटेबल है, HPSC चेयरमैन भी नॉट फाउंड सूटेबल हैं। हरियाणा का कोई बच्चा नॉट फाउंड सूटेबल नहीं है।

दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि दूसरे प्रदेश के आकर HPSC चेयरमैन कह रहे हैं कि हरियाणा की यूनिवर्सिटीज में बच्चों की शिक्षा अच्छी नहीं होती। जबकि, यूपीएससी परीक्षा, जेईई परीक्षा, नीट परीक्षा में हरियाणा के यही युवा सबसे ज्यादा चुने जाते हैं। उन्होंने कहा कि देश के भविष्य के लिए Gen Z के लिए आपको-हमको लड़ना पड़ेगा, ये हमारी जिम्मेदारी है। दीपेन्द्र हुड्डा ने सरकार को चेतावनी दी कि आज तो ट्रेलर है सरकार जाग जाए। नहीं तो जो देश में जंतर-मंतर पर दिखा था, देश के अन्य प्रदेशों में दिखा था, अगला ट्रेलर हरियाणा में दिखाने का काम करेंगे।

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने डिटेल में बताते हुए कहा कि हरियाणा पूरे देश में बेरोजगारी के मामले में नंबर वन राज्य है। इसीलिए हाईली क्वालिफाइड युवा भी चतुर्थ श्रेणी की मजदूरी करने के लिए विवश कर दिए गए हैं। HKRN के अंर्तगत कांट्रेक्चुअल पर्सन एक साल या उससे कम अवधि के लिए डेप्लॉय किए जाते हैं। उसके पश्चात अथॉरिटी उनका रिव्यू देती हैं। यदि वह संतुष्ट नहीं है तो उन्हें हटा दिया जाता है, इस कारण उनका भारी शोषण होता है।

सरकार द्वारा कौशल निगम में जो साजिश रची गई है, वह उसकी पॉलिसी को पढ़कर स्पष्ट हो जाती है। (POLICY – MEANS THE DEPLOYMENT OF CONTRACTUAL PERSONS POLICY 2022) पॉलिसी में साफ तौर पर लिखा गया है कि यह ‘अपॉइंटमेंट’ नहीं, बल्कि ‘डिप्लॉयमेंट’ है। उसमें ‘पेमेंट’ या ‘सैलरी’ नहीं लिखा गया, बल्कि ‘वेजेज’ (मजदूरी) लिखा गया है।

उसमें ‘पोस्ट’ नहीं लिखी गई है, बल्कि ‘जॉब रोल’ लिखा गया है। यानी जिस तरह किसी भी मजदूर को, किसी भी दिन, कोई भी काम पकड़ाया जा सकता है या कोई भी जॉब दी जा सकती है, उसी तरह कौशल कर्मियों पर भी यही शब्दावली लागू की गई है।

इसमें ‘ट्रांसफर’ नहीं लिखा गया है, बल्कि ‘पोस्टिंग’ लिखी गई है। इसमें ‘एम्प्लॉई’ नहीं लिखा गया है, बल्कि ‘कॉन्ट्रैक्चुअल पर्सन्स’ लिखा गया है। इसमें छुट्टी का भी प्रावधान नहीं है। ‘हॉलिडे’ की जगह सिर्फ ‘वीकली ऑफ’ का प्रावधान किया गया है।

यानी जो शब्दावली किसी कर्मचारी के कॉन्ट्रैक्ट में होती है और जो उसे वैधानिक तौर पर सरकार से संबंधित दिखाती है, वह तमाम शब्दावली कौशल कर्मियों के कॉन्ट्रेक्ट से निकाल ली गई है, ताकि उनके पास कोई वैधानिक अधिकार भी न रहे। संवैधानिक संस्था HPSC, HSSC सरकारी भर्तियों के लिए बनी है वह कमजोर की जा रही है और इसका काम HKRN द्वारा किया जा रहा है।

 

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