लगता है कि विपक्ष को गरीबों के जीवन स्तर में सुधार होने पर भी है आपत्ति : नायब सिंह सैनी

न्यूज़म ब्यूरो

चण्डीगढ, 27 फरवरी : हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राज्यपाल के अभिभाषण पर बजट सत्र के दौरान विपक्ष द्वारा उठाए गए सवाल का जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस ने प्रदेश को कर्ज में डुबोने का आरोप लगाया है, जबकि हमारी सरकार का इरादा और दिशा एकदम साफ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के शासन काल में वर्ष 2004-05 से 2014-15 तक दस साल की अवधि के दौरान, कर्ज देनदारियों में 458.30 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। जबकि, हमारे 10 साल के शासनकाल में 2014-15 से 2024-25 के बीच, कर्ज देनदारी में 227.49 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जोकि इनकी सरकार की तुलना में आधी से भी कम है।

उन्होंने कहा कि बजट अनुमान 2025-26 के अनुसार, राज्य का राजकोषीय घाटा सकल राज्य घरेल उत्पाद (जीएसडीपी) का 2.67 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जोकि फिसकल रिस्पोंसिबिलिटी एण्ड बजट मैनेजमेंट एक्ट के तहत 15वें वित्त आयोग द्वारा निर्धारित 3 प्रतिशत की सीमा से कम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने पिछले 10 वर्षों में ऋण सेवा के लिए 3 लाख 66 हजार 16 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। इसमें 1 लाख 61 हजार 796 करोड़ रुपये ब्याज भुगतान और 2 लाख 4 हजार 220 करोड़ रुपये मूलधन शामिल हैं। राज्य द्वारा मूलधन और ब्याज का भुगतान नियमित रूप से किया जा रहा है और अब तक किसी भी अवसर पर ऋण किस्त और ब्याज के भुगतान में कोई डिफ़ॉल्ट नहीं हुआ है। इसका तात्पर्य है कि राज्य की ऋण स्थिति टिकाऊ है।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष द्वारा राशन कार्ड से संबंधित मुद्दा पिछले बजट अधिवेशन में भी उठाया गया था। सदन में मार्च, 2025 में बजट अधिवेशन के दौरान 27 मार्च को बी.पी.एल. कार्डों के विषय पर अपनी बात रखी थी। उन्होंने कहा कि उस समय विपक्ष ने 50 लाख से अधिक बी.पी.एल. राशन कार्ड बनाने पर आपत्ति जताई थी। ये रिकार्ड की बात है, रिकार्ड निकाल कर इसे चैक करवा सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की योजनाओं की वजह से तो लोगों के जीवन स्तर में सुधार हुआ है और वे स्वतः ही गरीबी रेखा से बाहर आ गये हैं। सरकार ने किसी का राशन कार्ड नहीं काटा है बल्कि उनका जीवन स्तर ऊपर उठाकर उन्हंे गरीबी रेखा से बाहर निकालने में मदद की है। लेकिन, लगता है कि विपक्ष को गरीबों के जीवन स्तर में सुधार होने पर भी आपत्ति है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सदन की भावना के अनुरूप हरियाणा की जनता से अनुरोध किया था कि जिन लोगों ने जिस किसी भी कारण से, गलती से या गलत नीयत से पी.पी.पी. में अपनी इनकम कम दिखाई है, वे इसे ठीक करवा लें। वे स्वयं ही बीपीएल कैटेगरी से बाहर हो जाएंगें। इसके बाद, अनेक लोगों ने अपने नाम बी.पी.एल. सूची से कटवा लिए हैं। इनके अलावा, सरकार ने दोबारा इनकम वेरिफिकेशन भी करवाई। इस दौरान जिन लोगों की आय 1 लाख 80 हजार रुपये से अधिक थी, उनको बी.पी.एल. सूची से बाहर कर दिया गया है।

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