“समय पर समय, कार्रवाई शून्य, रोहित हत्याकांड में कल डीजीपी से होगी निर्णायक मुलाकात”

एसपी ने फिर मांगा वक्त, परिवार बोला : अब तक जांच आगे क्यों नहीं बढ़ रही
 
 
रोहतक/भिवानी, 8 दिसंबर | अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रोहित धनखड़ हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर आज हुमायूंपुर और बखेता गांव की पंचायत, खाप प्रतिनिधि और पीड़ित परिवार के सदस्य भिवानी के पुलिस अधीक्षक (एसपी) से मिलने पहुंचे। इस मुलाकात में पंचायत और परिवार ने स्पष्ट शब्दों में पूछा कि हत्या को 12 दिन बीत जाने के बावजूद अब तक एक भी आरोपी गिरफ्तार क्यों नहीं हुआ, जबकि प्रशासन लगातार समय पर समय मांगता आ रहा है। 
 
एसपी भिवानी की ओर से परिवार और पंचायत से एक–दो दिन का और समय मांगा गया, लेकिन इस जवाब से परिवार और समाज पूरी तरह असंतुष्ट नजर आया। परिजनों का कहना है कि “पिछले 12 दिनों से हमें सिर्फ समय दिया जा रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि अब तक किसी एक भी हत्यारे को पुलिस पकड़ नहीं पाई है। हर बार वही बात दोहराई जाती है कि जांच चल रही है, लेकिन जमीन पर उसका कोई ठोस परिणाम दिखाई नहीं देता।”
 
पंचायत और सामाजिक प्रतिनिधियों ने एसपी के समक्ष यह भी सवाल उठाया कि जब मामले में पुख्ता सबूत, सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल, संदिग्धों के नाम, लोकेशन इनपुट जैसी तकनीकी जानकारियां सामने लाई जा चुकी हैं, तो पुलिस अब तक इन कड़ियों को जोड़कर किसी निष्कर्ष तक क्यों नहीं पहुंच पाई। गांव और परिवार का सीधा आरोप है कि पुलिस प्रशासन का ढीला रवैया ही अब तक हत्यारों को बचाए हुए है, जिससे लोगों में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।
 
आज की मुलाकात के बाद पंचायत, खाप और समाज पूरी तरह से पुलिस की कार्यप्रणाली से असंतुष्ट नजर आए। पंचायत का साफ कहना है कि जब इतने गंभीर मामले में 12 दिन बाद भी पुलिस आरोपियों तक नहीं पहुंच पाई, तो यह या तो प्रशासन की घोर लापरवाही है या फिर किसी दबाव का संकेत। दोनों ही स्थितियां अत्यंत चिंताजनक हैं।
 
पंचायत और परिवार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अब कल हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (DGP) से सीधे मुलाकात की जाएगी और उन्हें अब तक की पूरी स्थिति से अवगत कराया जाएगा। इस बैठक से समाज को अब अंतिम उम्मीद है कि शीर्ष स्तर से सख्त हस्तक्षेप कर हत्या के आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाएगी।
 
पंचायत ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि डीजीपी से मिलने के बाद भी कोई ठोस समाधान नहीं निकलता, और हत्यारे यूं ही खुले घूमते रहे, तो फिर खाप, पंचायत और समाज मिलकर एक बड़ा और निर्णायक फैसला लेने के लिए मजबूर होंगे। इसके बाद उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
 
आज भी दोनों गांवों में माहौल बेहद संवेदनशील है। लोगों में गुस्सा, पीड़ा और आक्रोश साफ दिखाई दे रहा है। हर कोई यही सवाल कर रहा है कि जब एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी की हत्या के बाद भी इंसाफ नहीं मिलता, तो सामान्य आदमी की सुरक्षा की गारंटी कौन देगा?
 

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