मोदी सरकार में सशक्त होती नारी शक्ति

भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में समय-समय पर ऐसे ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं, जिन्होंने देश की दिशा और दशा दोनों को बदलने का काम किया है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण कानून) भी ऐसा ही एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम है, जिसने देश की आधी आबादी को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में नई ऊर्जा भर दी है। यह अधिनियम केवल महिलाओं को आरक्षण देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नए भारत की सोच, समानता की प्रतिबद्धता और समावेशी विकास के संकल्प का प्रतीक है।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम के अंतर्गत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग की महिलाओं को भी आरक्षण का लाभ मिलेगा। राजनीति में महिलाओं की भागीदारी केवल प्रतीकात्मक न रहकर वास्तविक और प्रभावी बने।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने जिस दृढ़ता और प्रतिबद्धता के साथ इस कानून को पारित कराया, वह अभूतपूर्व है। दशकों से लंबित इस मांग को पहले कई सरकारें पूरा नहीं कर सकीं, लेकिन मोदी सरकार ने इसे राजनीतिक इच्छाशक्ति और स्पष्ट विजन के साथ साकार किया।

यह वही सरकार है जिसने “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ”, “उज्ज्वला योजना” और “स्वच्छ भारत मिशन” जैसी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं के जीवन स्तर को बेहतर बनाने का काम किया। नारी शक्ति वंदन अधिनियम इस दिशा में एक और बड़ा कदम है जो महिलाओं को निर्णय लेने की मुख्यधारा में स्थान दिलाएगा।

इसी माह होने वाला संसद सत्र कई मायनों में महत्वपूर्ण है। इस सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के कार्यान्वयन और आगे की प्रक्रियाओं पर चर्चा संभव है।

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महिला सशक्तिकरण से जुड़े अन्य मुद्दों और योजनाओं पर भी गंभीर विचार-विमर्श होगा। यह सत्र इस बात का संकेत होगा कि सरकार केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे जमीन पर लागू करने के लिए भी सक्रिय रूप से प्रयासरत है।

भारत में महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी हैं, चाहे वह शिक्षा हो, विज्ञान, खेल या प्रशासन। लेकिन राजनीति में उनकी भागीदारी लंबे समय तक सीमित रही। इस अधिनियम के लागू होने से संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की संख्या में बड़ी वृद्धि होगी। नीति निर्माण में महिलाओं का दृष्टिकोण शामिल होगा।

सामाजिक मुद्दों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा पर अधिक संवेदनशील निर्णय लिए जाएंगे। यह कानून न केवल महिलाओं को अधिकार देता है, बल्कि उन्हें नेतृत्व की भूमिका में स्थापित करता है।

हर बड़े बदलाव के साथ कुछ चुनौतियां भी आती हैं, लेकिन जब नेतृत्व नरेंद्र मोदी जी जैसे मजबूत प्रधानमंत्री के हाथों में हों, तो चुनौतियों से पार पा ही ली जाती है।

राजनीतिक दलों को महिलाओं को वास्तविक अवसर देने ही होंगे और समाज में अब भी मौजूद कुछ रूढ़िवादी सोच को बदलना होगा। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अधिनियम के माध्यम से एक मजबूत नींव रख दी है। जिस पर भविष्य में और भी बड़े सुधार किए जा सकेंगे।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम भारत के लोकतंत्र को और अधिक समावेशी, संतुलित और सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह उस सोच को दर्शाता है, जिसमें महिलाओं को केवल मतदाता नहीं, बल्कि निर्णायक शक्ति के रूप में देखा जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी के नेतृत्व में यह पहल यह साबित करती है कि नया भारत समान अवसर, महिला सम्मान और समग्र विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। आने वाला समय इस कानून के सकारात्मक प्रभावों का साक्षी बनेगा और भारत विश्व के सामने एक सशक्त, समावेशी और प्रगतिशील लोकतंत्र के रूप में और अधिक मजबूती से उभरेगा।

लेखिका : डा. अर्चना गुप्ता
प्रदेश महामंत्री,
भाजपा हरियाणा

 

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